बैतूल , मार्च 13 -- मध्यप्रदेश के बैतूल शहर में लोक निर्माण विभाग द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई व्हाइट टॉपिंग सड़कों की गुणवत्ता जांच के घेरे में आ गई है। सड़कों के जल्दी खराब होने और निर्माण में लापरवाही की शिकायतों के बाद उच्च स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार शहर में गुरुवार को अलग-अलग स्थानों से कोर कटर मशीन के माध्यम से सड़क के सैंपल निकाले गए, जिन्हें केंद्रीय परीक्षण प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जा रहा है।
बैतूल शहर में लगभग दो किलोमीटर लंबी सीमेंट-कांक्रीट की व्हाइट टॉपिंग सड़क करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई है। यह सड़क कोतवाली चौराहे से कलेक्टोरेट तक और नेहरू पार्क से चौपाटी सदर क्षेत्र तक निर्मित की गई है। निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़क की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने लगी थीं।
शिकायतों के बाद चीफ इंजीनियर कार्यालय ने तीन अधिकारियों की टीम बैतूल भेजी। टीम ने कोठी बाजार क्षेत्र से जांच की शुरुआत करते हुए कोर कटर मशीन से सड़क काटकर सैंपल निकाले। अब तक तीन सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें केंद्रीय प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया है। प्रयोगशाला में सैंपलों की सीमेंट-कांक्रीट की मजबूती, गुणवत्ता और निर्माण मानकों के अनुरूपता की जांच की जाएगी।
इससे पहले बैतूल बाजार नगर परिषद क्षेत्र में बनी सड़क की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद जांच में सैंपल मानकों पर खरे नहीं पाए गए थे और सड़क को दोबारा बनाने के निर्देश दिए गए थे।
व्हाइट टॉपिंग सड़कों की जांच शुरू होने से लोक निर्माण विभाग में हलचल की स्थिति है। यदि केंद्रीय प्रयोगशाला की जांच में गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
लोक निर्माण विभाग के एसडीओ डी.एस. परमार ने बताया कि चीफ इंजीनियर कार्यालय की टीम ने सड़क के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए केंद्रीय प्रयोगशाला भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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