वाशिंगटन/नयी दिल्ली , जनवरी 01 -- अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा बुधवार को वेनेजुएला में निकोलस मादुरो की सरकार के 'शैडो फ्लीट' से जुड़ी चार शिपिंग कंपनियों और चार तेल टैंकरों पर नये प्रतिबंधों की घोषणा के बाद निजी क्षेत्र की भारतीय रिफाइनरियां आपूर्ति श्रृंखला में फिर से व्यवधान से निपटने की तैयारी कर रही हैं।

शैडो फ्लीट, जिसे डार्क फ्लीट के नाम से भी जाना जाता है, टैंकरों और सहायक जहाजों के एक समूह को दर्शाता है जो प्रतिबंधित या उच्च जोखिम वाली वस्तुओं को स्थानांतरित करने के लिए भ्रामक शिपिंग विधियों का इस्तेमाल कर वास्तविक मूल, स्वामित्व या गंतव्य को छिपाते हैं ।

ट्रम्प प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे "अधिकतम दबाव" अभियान के तहत इस कदम का उद्देश्य वेनेजुएला सरकार की वित्तीय आपूर्ति को अवरुद्ध करना है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता भारत के लिये यह निर्णय पहले से ही नाजुक ऊर्जा सुरक्षा परिदृश्य को और अधिक जटिल बना सकता है।

ये प्रतिबंध उन जहाजों को निशाना बनाते हैं जिन पर वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल के परिवहन के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करने का आरोप है। हालांकि भारत हाल के वर्षों में अपने तेल भंडार में काफी विविधता लाया है फिर भी वेनेजुएला का कच्चा तेल रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी निजी क्षेत्र की भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक मूल्यवान कच्चा माल बना हुआ है। ये रिफाइनरी विशेष रूप से सस्ते, भारी ग्रेड के तेल को संसाधित करने के लिए डिज़ाइन की गयी हैं।

उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि इन विशिष्ट टैंकरों को "अवरुद्ध संपत्ति" सूची में शामिल करने से उपमहाद्वीप के लिए सभी निर्धारित माल परिवहन तत्काल रोक दिया जाएगा।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, "वित्तीय विभाग राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा मादुरो शासन पर दबाव बनाने के अभियान को जारी रखेगा। हम मादुरो सरकार को अवैध तेल निर्यात से लाभ कमाने की अनुमति नहीं देंगे, जबकि वह अमेरिका में नशीले पदार्थों की भारी खेप भेज रहा है।"भारत के लिये इन प्रतिबंधों का समय विशेष रूप से संवेदनशील है। हाल ही में अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसे प्रमुख रूसी उत्पादकों पर लगाये गये प्रतिबंधों के कारण भारतीय रिफाइनरी पहले ही रूसी तेल का आयात कम कर रही हैं। वेनेजुएला को पहले रूसी तेल की कमी को पूरा करने वाले संभावित स्रोत के रूप में देखा जा रहा था, ऐसे में इस नवीनतम कार्रवाई से भारतीय कंपनियों के विकल्प सीमित हो गए हैं।

जहाजरानी आंकड़ों के अनुसार, प्रतिबंधित जहाजों में से कम से कम एक को उन मार्गों पर देखा गया था जिनका उपयोग अक्सर भारत और चीन सहित एशियाई बाजारों को आपूर्ति करने के लिए किया जाता है।

विदेश मंत्रालय ने हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है लेकिन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मानदंडों का "सख्ती से पालन" करते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देना जारी रखेगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित