, Dec. 3 -- बीजिंग, 03 दिसंबर (वार्ता/शिन्हुआ) चीन ने एशिया और लैटिन अमेरिका में 'शांति बनाये रखने' की मांग करते हुए अमेरिका से अनुरोध किया है कि वह उसके और वेनेज़ुएला के आंतरिक मामलों में दख़लंदाज़ी न करे और दोनों देशों की अखंडता का सम्मान करे।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 29 नवंबर को एक बयान में कहा था कि वेनेज़ुएला के ऊपर और उसके आसपास के हवाई क्षेत्र को 'पूरी तरह' बंद माना जाए। वेनेज़ुएला की सरकार ने इस बयान का विरोध करते हुए अपनी ओर से एक बयान जारी किया। वेनेज़ुएला का कहना था कि इस तरह की टिप्पणियां संयु्क्त राष्ट्र के चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन करते हैं। लैटिन अमेरिका और कैरिबियन के कई अन्य देशों ने भी अमेरिका के बयान का विरोध किया था।
चीन के विदेश मंत्री लिन जियान ने भी वेनेज़ुएला के पक्ष में उतरते हुए बुधवार को कहा कि चीन किसी भी सूरत में वेनेज़ुएला के आंतरिक मामलों में बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप का विरोध करेगा। श्री जियान ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीन ऐसे किसी भी काम का विरोध करता है जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मकसद और सिद्धांतों का उल्लंघन करता हो और दूसरे देशों की अखंडता और सुरक्षा में दखल देता हो।
उन्होंने सभी पार्टियों से अपील की कि वे मिलकर लैटिन अमेरिका और कैरिबियन को शांति क्षेत्र के तौर पर बनाए रखें।
दूसरी ओर, चीन ने ताइवान को एक स्वतंत्र देश मानने की श्री ट्रम्प की योजना का भी विरोध किया है और उनसे चीन की अखंडता का सम्मान करने के लिये कहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्री ट्रंप ने एक अधिनियम पर हस्ताक्षर करते हुए विदेश मंत्रालय को आदेश दिया कि वह नियमित रूप से अमेरिका और ताइवान के बीच बातचीत की समीक्षा करे और ताइवान के साथ बातचीत को और गहरा करने के तरीके ढूंढे।
इसके जवाब में श्री जियान ने एक एक अन्य प्रेस वार्ता में कहा कि चीन अमेरिका और ताइवान इलाके के बीच किसी भी तरह के आधिकारिक संवाद का कड़ा विरोध करता है। उसका यह मत साफ है। ताइवान का सवाल चीन के मुख्य हितों का केंद्र है और यह पहली सीमा है जिसे चीन-अमेरिका रिश्तों में पार नहीं किया जा सकता।
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