पटना , दिसंबर 27 -- बिहार सरकार वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगों की देखभाल और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये राज्यभर में 101 बुनियाद केंद्रों का सफल संचालन कर रही है और इन केंद्रों के माध्यम से जरूरतमंदों को स्वास्थ्य, परामर्श और सामाजिक सुरक्षा सेवाएं पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।

राज्य में संचालित इन 101 बुनियाद केंद्रों में से 38 केंद्र जिला स्तर पर जबकि 63 केंद्र अनुमंडल स्तर पर कार्यरत हैं। समाज कल्याण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 से अब तक 16 लाख, 56 हजार, 259 लाभुकों ने इन केंद्रों से सेवायें प्राप्त की हैं। इनमें 10 लाख, 94 हजार वृद्धजन, चार लाख, 59 हजार दिव्यांग और एक लाख, दो हजार विधवायें शामिल हैं।

बुनियाद केंद्रों का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सेवाओं को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना है। इन केंद्रों पर फिजियोथेरेपी, आंखों की जांच, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पेंशन और दिव्यांग प्रमाणपत्र से जुड़ी सहायता है, जो एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही हैं।

प्रत्येक बुनियाद केंद्र में साइकोलॉजिस्ट, फिजियोथैरेपिस्ट, नेत्र विशेषज्ञ, केयर गिवर और लीगल एडवाइजर की तैनाती की गई है। शोषण या अत्याचार के शिकार वृद्ध, दिव्यांग या विधवाओं को कानूनी सलाह और सुरक्षा उपलब्ध कराने में लीगल एडवाइजर अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा केंद्रों में मैनेजर, लिआज़न ऑफिसर, कंप्यूटर ऑपरेटर, रोजगार प्रशिक्षक, रसोइया, स्टोर कीपर और केयर टेकर भी कार्यरत हैं।

वृद्धजनों और दिव्यांगों में आमतौर पर घुटनों और कमर का दर्द, चलने- फिरने में कठिनाई, हाथों से वस्तुयें पकड़ने में परेशानी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिये बुनियाद केंद्रों में आधुनिक मशीनों से युक्त फिजियोथेरेपी सुविधा उपलब्ध है, जिससे उपचार के माध्यम से पीड़ा को कम किया जा रहा है।

नेत्र जांच के लिए विशेषज्ञों की व्यवस्था की गई है। जांच के बाद 50 वर्ष से अधिक आयु के जरूरतमंद लाभुकों को नि:शुल्क चश्मा भी प्रदान किया जाता है। वहीं, साइकोलॉजिस्ट द्वारा की जाने वाली काउंसलिंग के जरिए मानसिक तनाव, अकेलापन और अवसाद से जूझ रहे लोगों को राहत मिल रही है।

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