हैदराबाद , जनवरी 03 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को तेलंगाना विधानसभा की ओर से विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी अधनियम 2025) को लेकर पारित प्रस्ताव को खारिज कर दिया और इसे कांग्रेस का पाखंड करार दिया है।
गौरतलब है कि शुक्रवार को तेलंगाना विधानसभा ने वीबी-जी राम जी अधिनियम के विरोध में एक प्रस्ताव पारित किया था। वीबी-जी राम जी अधिनियम ने 2006 में शुरू की गई मनरेगा योजना की जगह ली है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एन रामचंद्र राव ने शनिवार को एक बयान में कहा कि वीबी-जी राम जी अधिनियम का कांग्रेस पार्टी का विरोध एक बार फिर साबित करता है कि वह मूल रूप से सुधार, विकेंद्रीकरण और जवाबदेही के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव श्रमिकों के कल्याण के बारे में नहीं है। यह ग्रामीण भारत पर राजनीतिक नियंत्रण खोने के कांग्रेस के डर के बारे में है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक कांग्रेस ने रोजगार योजनाओं को राजनीतिक खैरात के रूप में इस्तेमाल किया, जिन्हें केंद्रीकृत प्रणालियों के माध्यम से चलाया जाता था, जो लीकेज, बिचौलियों और देरी से भरी हुई थीं। पंचायतों को कमजोर रखा गया, श्रमिकों को निर्भर रखा गया और भ्रष्टाचार फलता-फूलता रहा। उन्होंने कहा कि आज महात्मा गांधी पर कांग्रेस का आंसू बहाना बेशर्म नाटक के अलावा कुछ नहीं है।
दशकों तक कांग्रेस ने अलग-अलग नामों से रोज़गार योजनाएं चलाईं, जिनमें जवाहर रोज़गार योजना (1989), जवाहर रोज़गार समृद्धि योजना (1999), संपूर्ण ग्रामीण रोज़गार योजना (2001), और नरेगा (2005)। उन्होंने सवाल किया कि इस दौरान कांग्रेस को कभी महात्मा गांधी की याद नहीं आई। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की अचानक बापू के प्रति 'श्रद्धा' जागी और उसने योजना का नाम बदलकर मनरेगा कर दिया।
उन्होंने कहा कि यह बात ही साबित करती है कि गांधी का नाम कभी विचारधारा या सम्मान के बारे में नहीं, बल्कि इसका इस्तेमाल वोट के लिए किया गया था। इससे भी ज़्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि कांग्रेस के अपने सर्वोच्च नेता ने मनरेगा को बेकार बता दिया है। श्री राहुल गांधी ने 16 मार्च, 2021 को खुले तौर पर माना कि इस योजना का विज़न खत्म हो गया है और यह अब काम नहीं कर रही है।
श्री राव ने कहा कि यह वही कांग्रेस है जो अब खोखले प्रस्तावों के ज़रिए मनरेगा का बचाव करने का नाटक कर रही है। उन्होंने कहा कि रोज़गार गारंटी पर किसी को भी भाषण देने का कांग्रेस के पास कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी अधिनियम कांग्रेस के ज़माने की सुस्ती और दिखावे की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। यह गारंटीड रोज़गार को 125 दिन तक बढ़ाता है, बेरोज़गारी भत्ते और देरी से मिलने वाले श्रमिक मुआवज़े को मज़बूत करता है, और असली ताकत दिल्ली में बैठे नौकरशाहों के बजाय ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं के हाथों में देता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के केंद्रीकृत और कमज़ोर मॉडल के उलट, यह अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि कम से कम 50 प्रतिशत काम स्थानीय स्तर पर हों, जल संरक्षण, अवसंरचना , आजीविका और आपदा से निपटने पर ध्यान देता है और महिलाओं और स्व सहायता समूह (एसएचजी) को खास प्राथमिकता देता है। अनिवार्य सोशल ऑडिट, बायोमेट्रिक अटेंडेंस, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) सत्यापन और सार्वजनिक डैशबोर्ड कांग्रेस के सबसे बड़े डर पारदर्शिता को सामने लाते हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस घबराई हुई है क्योंकि वीबी-जी राम जी अधिनियम वह देता है जो कांग्रेस कभी नहीं दे पायी, बिना भाषणबाज़ी के नतीजे, बिना दिखावे के सशक्तिकरण और बिना राजनीतिक नाटक के सुधार। भारत को गांधी के नाम पर कांग्रेस के उपदेशों की ज़रूरत नहीं है। उसे शासन की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि वीबी-जी रामजी अधिनियम विकसित भारत @ 2047 के लिए है, और वास्तव में इसी वजह से कांग्रेस इसका विरोध कर रही है।
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