गांधीनगर , दिसंबर 06 -- गुजरात के राजकोट में जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में आयोजित होने वाले दूसरे वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेन्स (वीजीआरसी) और वाइब्रेंट गुजरात रीजनल एग्ज़िबिशन (वीजीआरई) में कच्छ के भुजोडी के बुनकर शिल्प का प्रदर्शन कर सकेंगे।

सूत्रों ने शनिवार को बताया कि भुजोडी गांव पारंपरिक कारीगरी का एक जीवंत और सशक्त केंद्र है। यह गांव अपने 46 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिल्पियों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस समृद्ध शिल्प विरासत में छह संत कबीर पुरस्कार प्राप्तकर्ता, 20 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, एक शिल्प गुरु, चार कला-निधि पुरस्कारधारी और हैंडलूम-हस्तकला क्षेत्र में विभिन्न राज्य पुरस्कार प्राप्त करने वाले बुनकर भी इसमें शामिल हैं। भुजोडी विश्वभर में अपने हैंडलूम बुनाई के लिए जाना जाता है, जहां विश्व विख्यात भुजोडी शॉल, पारंपरिक ऊनी रजाइयां और कंबल तैयार किये जाते हैं।

राजकोट दूसरे वीजीआरसी और वीजीआरई में भुजोडी के ये शिल्पी विशेष रूप से भाग लेने जा रहे हैं। यह सहभागिता आर्थिक और नीतिगत, दोनों स्तरों पर बड़े लाभ का आधार बनेगी। यह क्षेत्रीय सम्मेलन कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र की आर्थिक और सांस्कृतिक प्रगति विशेषकर हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट क्षेत्र को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम में एक विशेष 'क्राफ्ट विलेज' बनाया जाएगा, जहां ये कारीगर अपने पुरस्कार-विजेता शिल्प का प्रदर्शन कर सकेंगे।

साथ ही एक महत्वपूर्ण रिवर्स बायर-सेलर मीट (आरबीएसएम) भी आयोजित होगी जो इन एमएसएमईएस को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जोड़ेगी और नए निर्यात बाज़ारों के द्वार खोलेगी। इसके अलावा, सम्मेलन का उद्यमी मेला कारीगरों को तात्कालिक व्यावसायिक सहयोग, आर्थिक सहायता, वित्तीय लिंकेज और नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करेगा जिससे समुदाय की उद्यमशीलता क्षमता और भी मजबूत होगी।

पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान यह सुनिश्चित करेगा कि भुजोडी के ये पारंपरिक शिल्पकार अपनी कला-संरक्षण की मेहनत का स्थायी आर्थिक लाभ उठा सकें। राजकोट का यह वीजीआरसी आयोजन भुजोडी के शिल्पियों के लिए अपने अनुभव, पुरस्कार और वैश्विक पहचान को दीर्घकालिक व्यापारिक सफलता में बदलने का एक ऐतिहासिक अवसर है। यह वह महत्वपूर्ण मोड़ है, जहां भुजोडी की कला विरासत को वैश्विक मंच पर निरंतर फलने-फूलने के लिए आवश्यक निवेश और पहचान मिलने की उम्मीद है।

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