नयी दिल्ली , अप्रैल 07 -- चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा है कि पुरुषों का अपनी बीमारी एवं स्वास्थ्य लक्षणों को नजरअंदाज करना उनकी जान के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है तथा समय पर डॉक्टर के पास न जाने की प्रवृत्ति के कारण कई बीमारियां देर से पकड़ में आती हैं, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है।

वीएनए अस्पताल के निदेशक एवं संस्थापक डॉ. विनीत मल्होत्रा ने बताया कि पुरुष अक्सर व्यस्त जीवनशैली और जिम्मेदारियों के चलते अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं देते। यही वजह है कि वे तब ही डॉक्टर के पास जाते हैं जब बीमारी गंभीर हो जाती है। इस आदत के कारण न केवल स्वास्थ्य जोखिम बढ़ता है, बल्कि इलाज पर खर्च भी अधिक होता है।

डॉ. मल्होत्रा के अनुसार, हृदय रोग पुरुषों में मृत्यु का प्रमुख कारण बना हुआ है और अब 30 से 40 वर्ष के पुरुषों में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। खराब खान-पान, धूम्रपान, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके मुख्य कारण बताए गए हैं। छाती में दर्द, थकान और सांस फूलने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने कहा कि पुरुषों का मानसिक स्वास्थ्य भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिस पर खुलकर चर्चा नहीं होती। समाज में मजबूत दिखने की धारणा के कारण पुरुष अपनी भावनाएं साझा नहीं करते, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद बढ़ता है और इसका असर शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई गंभीर बीमारियां जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कैंसर लंबे समय तक बिना लक्षण के रहती हैं। ऐसे में समय पर जांच न होने से बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

चिकित्सा विशेषज्ञों ने पुरुषों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, रोजाना व्यायाम करने, संतुलित आहार लेने, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाने तथा मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की सलाह दी है। इसके साथ समय पर लक्षणों की पहचान और नियमित जांच से गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है। पुरुषों को अपनी सेहत के प्रति जागरूक होकर सक्रिय कदम उठाने की जरूरत है, तभी स्वस्थ समाज का निर्माण संभव होगा।

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