नयी दिल्ली , फरवरी 24 -- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय बुधवार से यहां हो रहे विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन के दौरान 'हिम कनेक्ट' कार्यक्रम आयोजित करेगा जिसमें हिमालयी क्षेत्र में कार्यरत शोधकर्ताओं को स्टार्टअप, निवेशकों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाया जा सकेगा।
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार 25 से 27 फरवरी तक यहां आयोजित 'हिम-कनेक्ट' कार्यक्रम एक ऐसा मंच है जिसका उद्देश्य भारतीय हिमालयी क्षेत्र में कार्यरत शोधकर्ताओं को स्टार्टअप, निवेशकों और नीति निर्माताओं से जोड़ना है, ताकि उनके शोध परिणामों को व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके। यह सम्मेलन 26 और 27 फरवरी को आगंतुकों के लिए खुला रहेगा।
पर्यावरण मंत्रालय के राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के तहत भारतीय हिमालयी क्षेत्र के नाजुक परितंत्र के लिए विकसित 24 से अधिक प्रौद्योगिकियों, प्रोटोटाइपों, पेटेंटों और प्रायौगिक परियोजनाओं को हिम-कनेक्ट के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक स्टार्टअप, निवेशक और नीति निर्माता शामिल होंगे। मिशन ने स्थानीय स्तर पर प्रासंगिक और विज्ञान-आधारित नवाचारों की एक विस्तृत श्रृंखला को बढ़ावा दिया है, लेकिन इनमें से कई प्रौद्योगिकियों को व्यावसायीकरण, तैनाती और उपयोग में लाने के लिए हिम-कनेक्ट एक कड़ी के रूप में कार्य करता है, जो ऐसे सहयोगी परितंत्र का निर्माण करता है जहां नवाचार उद्यम से मिलते हैं।
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