नोएडा , नवम्बर 12 -- उत्तर प्रदेश में जिला गौतमबुद्धनगर नोएडा सेक्टर 110 स्थित यथार्थ अस्पताल में बुधवार को डॉक्टर के एक पैनल द्वारा विश्व मधुमेह दिवस के उपलक्ष पर जानकारी देते हुए बताया कि डायबिटीज़ सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह तेजी से युवाओं में भी बढ़ रही है।

डॉक्टरों ने बताया कि ओपीडी में आने वाले हर पाँचवें मरीज को डायबिटीज़ की समस्या है। इसमें सबसे बड़ी वजह गलत खानपान, तनाव और कम शारीरिक गतिविधि है। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद डायबिटीज़ के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। उन्होंने कहा कोविड के बाद कई युवाओं में ब्लड शुगर बढ़ा हुआ पाया जा रहा है। कोविड के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और पैंक्रियास पर असर पड़ा है। साथ ही तनाव, असंतुलित खानपान और नींद की कमी भी इसकी बड़ी वजह है।

पैनल में मौजूद सीनियर कंसल्टेंट इंटर्नल मेडिसिन के डॉक्टर द्वारा बताया गया कि दिल्ली-एनसीआर में करीब 25 से 26 प्रतिशत लोग डायबिटीज़ से प्रभावित है, अब युवाओं और कामकाजी महिलाओं में भी डायबिटीज़ के नए मामले बढ़ रहे हैं। अगर लोग समय-समय पर शुगर टेस्ट और हेल्थ चेकअप करवाएं तो बीमारी को शुरुआती दौर में ही कंट्रोल किया जा सकता है। उन्हाेंने कहा कि मोटापा और बढ़ता स्क्रीन टाइम अब बड़ी चुनौती बन गए है, लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर पर रहने से शरीर की गतिविधियां कम हो जाती है खानपान बिगड़ता है और वजन बढ़ता है। यही मोटापा आगे चलकर डायबिटीज़ का खतरा बढ़ाता है।

डॉक्टरों ने बताया कि आजकल बच्चों में मोटापा बहुत तेजी से बढ़ रहा है और यह कम उम्र में डायबिटीज़ होने की बड़ी वजह बन गया है। ज़्यादातर बच्चे गलत खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और ज़्यादा मोबाइल या टीवी देखने के कारण तेजी से मोटे हो रहे हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें, मोबाइल और टीवी का समय सीमित करें और पौष्टिक आहार दें ताकि डायबिटीज़ जैसी बीमारियां समय से पहले न हों।

डॉक्टरों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज़ के मामले 10 से 14 प्रतिशत तक देखे जा रहे हैं। अगर ब्लड शुगर कंट्रोल में न हो तो बच्चे पर असर पड़ सकता है या समय से पहले डिलीवरी का खतरा रहता है। वहीं बच्चों में लगभग एक प्रतिशत डायबिटिक और 15 प्रतिशत प्रीडायबिटिक पाए जा रहे हैं।

वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा बताया गया कि अगर समय रहते डायबिटीज़ की पहचान हो जाए और जीवनशैली में सुधार किया जाए तो दवाइयों की ज़रूरत कम पड़ती है। संतुलित आहार नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद ही इसका सबसे अच्छा इलाज है।

आजकल मोटापा और डायबिटीज़ जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ बहुत बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नोएडा यथार्थ अस्पताल में एक विशेष ओबेसिटी क्लिनिक शुरुआत की गई है। यहां मरीजों को पूरी जांच, परामर्श और इलाज की सुविधा दी जाएगी ताकि वे अपना वजन नियंत्रित रख सकें और डायबिटीज़ का खतरा कम कर सकें।

यथार्थ अस्पताल के सीईओ डॉक्टर गौतमी ए.वी.ने कहा अस्पताल में हम डायबिटीज़ के बढ़ते मामलों को लेकर बेहद गंभीर हैं खासकर बच्चों और युवाओं में हमारा ध्यान सिर्फ इलाज पर नहीं बल्कि रोकथाम पर भी है। हम समय-समय पर स्वास्थ्य जांच परामर्श और जीवनशैली सुधार से जुड़ी जानकारी देते हैं ताकि लोग समय रहते डायबिटीज़ को पहचान सकें और स्वस्थ आदतें अपनाएं।

अस्पताल के विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि अगर परिवार में डायबिटीज़ का इतिहास हो तो नियमित रूप से शुगर टेस्ट करवाएं और लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें।

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