नयी दिल्ली , जनवरी 11 -- राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित विश्व पुस्तक मेले के दूसरे दिन रविवार को भाजपा हरियाणा प्रदेश प्रभारी एवं भाजपा राजस्थान के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां की पुस्तक 'अग्निपथ नहीं जनपथ' के पांचवें संस्करण का विधिवत विमोचन किया गया।

जयपुर स्थित वेरा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक वर्ष 2018 से 2023 तक उनके विधायक कार्यकाल के अनुभवों पर आधारित है, जिसमें विधानसभा की कार्यप्रणाली, जनहित से जुड़े मुद्दों और समकालीन राजनीतिक परिस्थितियों का तथ्यपरक विवरण दिया गया है।

पुस्तक में डॉ. पूनियां द्वारा विधानसभा में उठाये गये महत्वपूर्ण विषयों जैसे धर्मांतरण के विरुद्ध प्रस्तुत निजी सदस्य विधेयक (प्राइवेट मेंबर बिल), युवाओं और किसानों से जुड़े सवाल, केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कोरोना काल में किए गए कार्य तथा तत्कालीन कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों और आंतरिक अंतर्द्वंद्व का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि डॉ. पूनियां ने एक प्रभावी जननेता होने के साथ-साथ एक संवेदनशील लेखक के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल राजनीतिक संस्मरण नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने डॉ. पूनियां द्वारा प्रस्तुत धर्मांतरण विरोधी प्राइवेट मेंबर बिल को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, जो बाद में राजस्थान में कानून बना।

नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) के चेयरमैन प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने कहा कि डॉ. पूनियां का जीवन संघर्षों से भरा रहा है और वही संघर्ष पुस्तक के हर अध्याय में झलकता है। उन्होंने कहा कि किसी पुस्तक का पांचवें संस्करण तक पहुंचना उसकी वैचारिक शक्ति और पाठकों की स्वीकृति का प्रमाण है।

वरिष्ठ पत्रकार पल्लवी घोष ने कहा कि यह पुस्तक पत्रकारों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसमें विधानसभा की कार्यवाही के साथ-साथ राजस्थान की राजनीति के कई अनकहे पहलुओं को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चले राजनीतिक घटनाक्रम के विवरण को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया।

पुस्तक के लेखक डॉ. पूनियां ने कहा कि यह पुस्तक उनके विधायक कार्यकाल के अनुभवों का प्रामाणिक लेखा-जोखा है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को यह समझाना है कि विधानसभा के माध्यम से जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से कैसे उठाया जाए।

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