नयी दिल्ली , जनवरी 16 -- विश्व पुस्तक मेले के छठवें दिन (15 जनवरी) को हॉल नंबर-2 में साहित्यिक संवाद और बौद्धिक विमर्श से जुड़े दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसमें पहला आमने-सामने (फेस-टू-फेस) और भारत की बौद्धिक परंपराओं पर आधारित पैनल चर्चा शामिल रही, जिन्हें पाठकों और साहित्य प्रेमियों की उत्साहपूर्ण भाग लिया।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे पुस्तक मेले के आमने-सामने कार्यक्रम में प्रख्यात मलयालम लेखक एवं साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता केपी रामानुन्नी ने भाग लिया। उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन, रचनात्मक अनुभवों और लेखन की प्रेरणाओं पर खुलकर चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि वे कोझिकोड शहर से आते हैं, जिसे यूनेस्को द्वारा भारत का पहला और एकमात्र 'साहित्य नगर' घोषित किया गया है। कार्यक्रम के दौरान श्री रामानुन्नी ने अपनी चर्चित मलयालम लघु कहानी 'एमटीपी' (गर्भपात की चिकित्सा पद्धति) के अंशों का पाठ किया, जिसका अंग्रेज़ी अनुवाद अबू बकर काबा ने किया है। नाटकीय शैली में सात भागों में लिखी गई यह कहानी गर्भपात की चिकित्सा प्रक्रिया से जुड़े मानवीय संघर्ष और संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

उन्होंने अपने साहित्यिक सफर पर विचार करते हुए बताया कि किशोरावस्था में वह एक साथ आध्यात्मिक और साम्यवादी साहित्य पढ़ते थे, जिससे उनके भीतर गहरा वैचारिक संघर्ष पैदा हुआ। इस दौर में उन्होंने मनोचिकित्सक से परामर्श भी लिया, लेकिन अंततः लेखन को ही आत्मिक शांति और अभिव्यक्ति का माध्यम पाया।

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