नयी दिल्ली , जनवरी 12 -- राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में चल रहे नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेला के तीसरे दिन सोमवार को भारी संख्या में पाठकों की भीड़ उमड़ी। मेले में सुबह से ही परिवार, छात्र, युवा और पुस्तक प्रेमी मेले में पहुंचे। भारत मंडपम का पूरा परिसर पुस्तकों, विचारों और सांस्कृतिक गतिविधियों से जीवंत नजर आया।
मेले का सबसे प्रमुख आकर्षण का केंद्र 'भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य और प्रज्ञा 75' थीम पवेलियन रहा। यहां भारतीय सेना के टैंकों की प्रतिकृतियां, शौर्य से जुड़ी प्रदर्शनी और वर्दीधारी सैनिकों की उपस्थिति ने लोगों को खासा आकर्षित किया। युवा और बच्चे यहां सेल्फी लेते और सैन्य इतिहास को करीब से समझते दिखे।
पुस्तक मेले के तीसरे दिन कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। इनमें भारतीय सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और सांसद व वरिष्ठ अभिनेत्री हेमा मालिनी, वरिष्ठ भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी भी शामिल रहे।
जनरल अनिल चौहान ने थीम पवेलियन का भ्रमण किया और भारत के सैन्य इतिहास, नेतृत्व और रणनीतिक सोच पर आधारित प्रदर्शनी की सराहना की।
श्रीमती ईरानी ने भारत लिटरेचर फेस्टिवल के विशेष सत्र में भाग लेते हुए कहा कि यह पुस्तक मेला अब तक का सबसे अलग और प्रभावशाली आयोजन है। उन्होंने कहा कि पहली बार साहित्य के साथ शौर्य और दर्शन को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के बदलते दौर में भी विचारों और पुस्तकों की ताकत कभी कम नहीं होती।
इसके बाद आयोजित एक अन्य सत्र में हेमा मालिनी ने कवि दास नारायण की कृष्ण भक्ति पर आधारित पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर अरुण माहेश्वरी और विमलेश कांति वर्मा भी मौजूद रहे। श्रीमती हेमा मालिनी ने कहा कि यह केवल पुस्तक विमोचन नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का उत्सव है, जिसकी जड़ें सूरदास और मीराबाई जैसे संत कवियों से जुड़ी हैं।
अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम मंच पर कज़ाख़स्तान के इतिहासकार डॉ. सत्तार एफ. माज़हितोव ने इतिहास और सांस्कृतिक स्मृति पर अपने विचार रखे। उन्होंने भारत और कज़ाख़स्तान के ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए श्रीनगर में दफन ऐतिहासिक व्यक्तित्व मिर्ज़ा मुहम्मद हैदर दुगलत का उल्लेख किया। इसके बाद स्पेन और भारत के कवियों ने विभिन्न भाषाओं में कविता पाठ कर महिला स्वर और प्रेम विषय पर चर्चा की।
लेखक मंच पर 'नया नारी विमर्श' सत्र में प्रसिद्ध लेखिका ममता कालिया ने महिलाओं को बेखौफ होकर अपने अनुभव लिखने के लिए प्रेरित किया। इस चर्चा में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. बलवंत कौर भी शामिल रहीं।
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