नयी दिल्ली , फरवरी 03 -- चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान में देश में करीब 15 लाख कैंसर मामले हैं, जो 2045 तक बढ़कर 24.5 लाख से अधिक होने का अनुमान है।

विश्व कैंसर दिवस की पूर्व संध्या पर यहां प्रेस क्लब में इंडियन कैंसर सोसाइटी (आईसीएस) दिल्ली के संवाददाता सम्मेलन में चिकित्सा विशेषज्ञों ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे में कैंसर से निपटने की देश की रणनीति में समय से जांच और रोकथाम को केंद्र में रखना बेहद जरूरी है। ताकि समय से जांच होने पर हजारों जीवन को बचाया जा सके। केंद्रीय बजट में कैंसर की दवाओं के दाम में कमी की घोषणा का विशेषज्ञों ने स्वागत किया और इसके लिये सरकार को धन्यवाद भी ज्ञापित किया।

इस अवसर पर आईसीएस दिल्ली की अध्यक्ष ज्योत्सना गोविल ने कैंसर की रोकथाम, मरीज सहायता, उपचार एवं जागरूकता के प्रयास और संगठन की दशकों लंबी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कैंसर मरीजों के इलाज के लिये मिथकों को तोड़ना, समय पर जांच को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक जानकारी को लोगों तक पहुंचाना बहुत जरूरी है।

डॉ. नितेश रोहतगी, वरिष्ठ निदेशक (कैंसर विशेषज्ञ), फोर्टिस मेमोरियल अस्पताल ने भारत में कैंसर के मामलों और रुझानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उम्र के अनुसार रोकथाम के उपाय, शुरुआती स्क्रीनिंग और नई डायग्नोस्टिक तकनीकों के महत्व पर जोर दिया, जो इलाज के परिणाम बेहतर बनाने और लागत कम करने में मदद कर सकती हैं।

नीति आयोग की पूर्व निदेशक डॉ. उर्वशी प्रसाद जो खुद एक कैंसर सर्वाइवर (पीड़िता) रही हैं ने नीतिगत और व्यवस्थागत चुनौतियों पर ध्यान दिलाया। उन्होंने कैंसर आंकड़ों में खामियों, इलाज में क्षेत्रीय असमानताओं और वित्तीय बाधाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और कैंसर देखभाल में सतत सार्वजनिक निवेश की जरूरत पर बल दिया।

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