बेंगलुरु , जनवरी 29 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उनके परिवार को मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (मुडा) भूमि आवंटन मामले में औपचारिक रूप से दोषमुक्त कर दिया गया है।
जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने पुलिस लोकायुक्त द्वारा प्रस्तुत 'क्लोजर रिपोर्ट' को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उनके खिलाफ लगे आरोपों का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला। यह मामला उनके लिये साल भर से अधिक समय तक राजनीतिक गलियारों में गहमागहमी भरा रहा लेकिन इस फैसले के बाद श्री सिद्दारमैया और उनकी पत्नी बी.एम. पार्वती के लिये यह मामला समाप्त हो गया है।
आरोप लगाया गया था कि श्री सिद्दारमैया के प्रभाव के चलते मैसूर के एक पॉश इलाके में उनकी पत्नी पार्वती को 50:50 अनुपात योजना के तहत 14 भूखंड आवंटित किए गए थे। हालांकि, गहन जांच के बाद लोकायुक्त इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इसके लिए कोई सबूत नहीं है। अदालत ने भी इस निष्कर्ष की पुष्टि कर दी है।
मामले की अध्यक्षता कर रहे न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने स्पष्ट किया कि यह 'क्लीन चिट' श्री सिद्दारमैया, पार्वती, साले श्री मल्लिकार्जुन स्वामी और मूल भूमि मालिक श्री जे. देवराज पर लागू होती है।
वहीं अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच जारी रहेगी, जिसकी अगली सुनवाई के लिए नौ फरवरी की तारीख तय की गई है। अदालत ने जांच अधिकारी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की शिकायतकर्ता की याचिकाओं को खारिज करते हुए केंद्रीय एजेंसियों की संलिप्तता की सीमित संभावना का भी उल्लेख किया।
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