नयी दिल्ली , जनवरी 25 -- गणतंत्र दिवस परेड में इस वर्ष अनूठी पहल के तहत परेड देखने आने वाले लोगों के लिए बनी दर्शक दीर्घाओं के नाम देश की विभिन्न नदियों के नाम पर रखे गये हैं।

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार नदियाँ गहन सांस्कृतिक प्रतीक हैं जो सभ्यताओं की जीवनधारा, सामूहिक विरासत और सांस्कृतिक विविधता के भंडार के रूप में कार्य करती हैं। नागरिकों को इसका एहसास कराने के लिए इस बार देश भर में बहने वाली नदियों ब्यास, ब्रह्मपुत्र, चंबल, चिनाब, गंडक, गंगा, घाघरा, गोदावरी, सिंधु, झेलम, कावेरी, कोसी, कृष्णा, महानदी, नर्मदा, पेन्नार, पेरियार, रावी, सोन, सतलुज, तीस्ता, वैगई और यमुना के नाम पर दर्शक दीर्घाओं का नाम रखा गया है।

मंत्रालय का कहना है कि जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के विशेष अतिथि के रूप में कर्तव्य पथ पर इस गणतंत्र दिवस परेड में जल योद्धाओं सहित कुल 163 विशेष अतिथि होंगे जिनमें उत्तराखंड के 28, झारखंड के 10, बिहार के 40 और उत्तर प्रदेश के 85 लोग हैं। इसमें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और भारतीय वन्यजीव संस्थान के संयुक्त सहयोग से गंगा की पारिस्थितिकी, अखंडता तथा जैव विविधता के संरक्षण और स्वच्छता के लिए काम करने वाले स्थानीय समुदायों से गंगा प्रहरी-नदी के संरक्षक और प्रशिक्षित स्वयंसेवक शामिल हैं।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गंगा प्रहरियों के अलावा, जलीय जीवों यानी डॉल्फ़िन, कछुओं आदि के संरक्षण और संरक्षण में शामिल निजी नागरिकों, गैर सरकारी संगठनों और नदी संरक्षण और सामुदायिक पहुंंच को भी गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह विशेष अतिथि निमंत्रण न केवल सामुदायिक योगदान को मान्यता देता है, बल्कि ग्रामीण नागरिकों को कर्तव्य पथ पर ऐतिहासिक महत्व के राष्ट्रीय स्तर के समारोह को देखने का अवसर भी प्रदान करता है। उनकी उपस्थिति से लोगों की भागीदारी का संदेश और बल मिलेगा और राष्ट्रीय विकास प्रयासों के केंद्रीय तत्वों के रूप में सामुदायिक जुड़ाव भी महसूस होगा। इन विशेष अतिथियों को दर्शक दीर्घा में बिठाया जाएगा।

मंत्रालय के अनुसार जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के सचिव वी. एल. कंथा राव घाघरा परिक्षेत्र से गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेंगे। ये विशेष अतिथि 27 जनवरी को जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राज्य मंत्री वी. सोमन्ना तथा राज भूषण चौधरी से भी बातचीत करेंगे।

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