पटना , फरवरी 09 -- िहार जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने सोमवार कोकहा कि विपक्ष को कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर राजनीतिक उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
श्री कुशवाहा ने आज बयान जारी कर कहा कि वर्ष 2005 के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में अपराध के खिलाफ सख्त रुख, त्वरित कार्रवाई, मजबूत पुलिस व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने जैसे ठोस कदम उठाए गए, जिससे प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर श्री कुमार की दूरदर्शी दृष्टि अनुकरणीय और प्रशंसनीय रही है।
जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को अपने अतीत में जरूर झांकना चाहिए, जब महिलाएं सत्ता-पोषित अपराधियों के भय से चौखट के बाहर कदम नहीं रख पाती थीं। असुरक्षा का माहौल ऐसा था कि बेटियों का स्कूल-कॉलेज जाना भी दूभर हो गया था। अपराधियों का बोलबाला इस कदर था कि थानों में मुकदमे दर्ज नहीं होते थे। इसके विपरीत आज की परिस्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार किसी भी घटना के बाद समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करती है और दोषियों को शीघ्र सलाखों के पीछे पहुंचाती है। दरभंगा की घटना में भी आरोपित को चंद घंटों के भीतर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जो सरकार की संवेदनशीलता और तत्परता को दर्शाता है।
श्री कुशवाहा ने कहा कि अपराध के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ-साथ बेटियों की सुरक्षा और सशक्तिकरण नीतीश सरकार की प्राथमिकता रही है। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का ही परिणाम है कि महिलाएं शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि लालू-राबड़ी के 15 वर्षों के शासनकाल में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर कोई ठोस और दूरगामी नीति नहीं बनाई गई। उनकी राजनीति परिवार हित तक सीमित रही।
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