मुंबई , मार्च 02 -- उत्पादन और घरेलू बाजार में बिक्री बढ़ने देश में विनिर्माण गतिविधियों में फरवरी में चार महीने की सबसे बड़ी तेजी देखी गयी।
एचएसबीसी द्वारा जारी भारत विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकाकं (पीएमआई) जनवरी के 55.4 से बढ़कर फरवरी में चार महीने के उच्चतम स्तर 56.9 पर पहुंच गया। सूचकांक का 50 से नीचे रहना गतिविधियों में गिरावट को दर्शाता है जबकि इसका 50 से ऊपर रहना तेजी दिखाता है। वहीं, 50 का स्तर स्थिरता का है।
नये ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार और खरीदे गये भंडार आदि के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की जाती है।
एचएसबीसी द्वारा सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि मांग में तेजी, विपणन की पहल और क्लाइंटों की बढ़ती जरूरतों के कारण नये कारोबार में फरवरी में तेजी देखी गयी। वृद्धि की रफ्तार पिछले साल अक्टूबर के बाद के उच्चतम स्तर पर रही।
उत्पादन में चार महीने की सबसे बड़ी तेजी देखी गयी और यह दीर्घावधि औसत से अधिक रहा। हालांकि नये निर्यात ऑर्डरों में वृद्धि की रफ्तार 17 महीने के निचले स्तर पर दर्ज की गयी। जिन सेक्टरों में विदेशों में बिक्री बढ़ी है उनमें मुख्य योगदान एशिया, यूरोप, पश्चिम एशिया और अमेरिका का रहा है।
भारत में एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग के कारण उत्पादन में लगातार दूसरे महीने तेज गति से वृद्धि हुई है। हालांकि नये निर्यात ऑर्डरों में पिछले साल के मध्य में शुरू हुई सुस्ती फरवरी में भी जारी रही। इससे विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन कुछ हद तक बाधित रही।
ऑर्डर में कुल मिलाकर अच्छी वृद्धि के कारण कंपनियों ने कच्चे माल की अतिरिक्त खरीद की और इसमें तीन महीने की सबसे बड़ी तेजी रही।
विनिर्माताओं ने लागत की भरपाई के लिए फरवरी में एक बार फिर विक्रय मूल्य बढ़ा दिये। भविष्य को लेकर विनिर्माता आशांवित दिख रहे हैं। सोलह प्रतिशत कंपनियों का कहना है कि अगले एक साल में वृद्धि देखी जायेगी जबकि सिर्फ एक प्रतिशत को गतिविधियों में गिरावट की आशंका है।
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