चेन्नई , फरवरी 11 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के आगामी विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता के बंटवारे की कांग्रेस की मांग को स्पष्ट रूप से खारिज करने के कुछ ही घंटों बाद कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि उनका यह रुख उचित नहीं है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और लोकसभा में पार्टी सचेतक मणिक्कम टैगोर और अखिल भारतीय पेशेवर कांग्रेस के अध्यक्ष प्रवीण चक्रवर्ती ने जानना चाहा कि द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) इसे स्वीकार क्यों नहीं कर रही है।

हाल ही में कांग्रेस नेताओं के बयानों ने सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर चर्चा तेज कर दी थी। श्री स्टालिन ने खुले तौर पर यह घोषणा करके कि तमिलनाडु में यह काम नहीं करेगा, इस बढ़ती बहस पर विराम लगाने की कोशिश की थी।

इस पर तमिलनाडु कांग्रेस समिति (टीएनसीसी) के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थागई ने कहा कि इस मुद्दे पर श्री स्टालिन के साथ बातचीत करने के बाद इसे स्वीकार करने या नहीं करने का अंतिम निर्णय राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे नेता ही लेंगे।

श्री टैगोर ने 'इंडिया टुडे तमिलनाडु राउंड टेबल' में सत्ता के बंटवारे की मांग को खारिज करने वाले श्री स्टालिन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए 'एक्स' पर एक पोस्ट में बुधवार को कहा कि जनता तय करेगी कि अगले चुनाव के बाद तमिलनाडु में गठबंधन सरकार होनी चाहिए या एकल-पार्टी शासन। श्री टैगोर इस मांग को लगातार उठाते रहे हैं।

कांग्रेस सांसद ने वर्ष 2006 के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि 2006 में अपने दम पर बहुमत हासिल न करने के बावजूद द्रमुक ने सरकार बनाई थी और कांग्रेस के बाहरी समर्थन से अपना कार्यकाल पूरा किया था। उन्होंने कहा कि तब कांग्रेस ने सरकार में शामिल न होकर गलती की थी।

उनकी टिप्पणी को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि यदि 2026 में गठबंधन सत्ता में लौटता है, तो कांग्रेस शासन में बड़ी भूमिका मांग सकती है।

श्री स्टालिन की टिप्पणियों के बावजूद, रिपोर्टों से पता चलता है कि सीट-बंटवारे की बातचीत के दौरान कांग्रेस द्वारा अधिक सीटों और कैबिनेट में प्रतिनिधित्व के लिए दबाव बनाने की संभावना है। इन घटनाक्रमों के बीच भी श्री स्टालिन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ अपने संबंधों को 'भाईचारे' वाला बताया और कहा कि गठबंधन अभी भी बरकरार है।

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