देहरादून , नवंबर 03 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि भारत की विधानसभाएं संसदीय प्रणाली का प्रमुख स्तंभ हैं और संविधान निर्माताओं ने इसमें सतत जवाबदेही को महत्व दिया है।

श्रीमती मुर्मु ने उत्तराखंड राज्य स्थापना रजत जयंती के अवसर पर सोमवार को यहां विधानसभा के विशेष सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि विधानसभाएं भारतीय संसदीय प्रणाली का प्रमुख स्तंभ हैं। बाबासाहेब अम्बेडकर ने इसकी महता पर कहा था कि संविधान निर्माताओं ने संसदीय प्रणाली को अपनाकर सतत जवाबदेही को अधिक महत्व दिया है। इस तरह से जवाबदेही की निरंतरता जनता के प्रति संसदीय प्रणाली की ताकत है और चुनौती भी है।

उन्होंने कहा कि जनता की आकांक्षा के अनुरूप बेहतर प्रशासन और संतुलित विकास की दृष्टि से नवंबर 2000 में उत्तराखंड की स्थापना हुई थी। राज्य ने पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, डिजिटल और संपर्क तथा ढांचागत विकास के क्षेत्र में सराहनीय प्रगत्ति की है। विकास के समग्र प्रयासों के बल पर राज्य में मानव विकास आंकड़ा कई मानकों पर सुधरा है। यह जानकर और प्रसन्नता हुई कि राज्य में साक्षरता बढ़ी है, महिलाओं की शिक्षा में विस्तार हुआ है, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटी है तथा स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के प्रयास चल रहे हैं।

महिला सशक्तीकरण की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को विशेष सराहनीय बताते हुए उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से ही सुशीला बलूनी, बछेन्द्री पाल, गौरा देवी, राधा भट्ट और वंदना कटारिया जैसी सशक्त और असाधारण महिलओं की गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ेगी।

उनका कहना था कि श्रीमती ऋतु खंडूरी को राज्य की पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त करके उत्तराखंड विधान सभा ने अपना गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि वह चाहती है कि उत्तराखंड विधानसभा में महिलाओं की संख्या में और बढ़ोतरी हो।

उत्तराखंड सरकार के समान नागरिक संहिता कानून को लागू करने की सराहना करते हए श्रीमती मुर्मू ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने 'नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता' के निर्माण के लिए अनुच्छेद 44 तहत प्रावधान किया था। समान नागरिक संहिता विधेयक लागू करने से जुड़े विधानसभा सदस्यों की मैं सराहना करती हूं। उन्होंने कहा "मुझे बताया गया है कि विधान सभा ने 550 से अधिक विधेयक पारित किए हैं और मैं इसकी सराहना करती हूं।"श्रीमती मुर्मू ने कहा "विधायक सरकार तथा जनता के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी है और जमीनी स्तर पर क्षेत्र की जनता से जुड़कर उनकी सेवा करने का अवसर मिलना बड़े सौभाग्य की बात है। एक विधायक के रूप में मुझे नौ वर्ष जन-सेवा का अवसर मिला था। अपने अनुभव के आधार पर कह सकती हूं कि यदि विधायक सेवा-भाव से निरंतर जनता की समस्याओं के समाधान तथा उनके कल्याण में सक्रिय रहेंगे तो जनता और जन-प्रतिनिधि के बीच विश्वास का बंधन अटूट बना रहेगा। सामान्य जनता, जन-प्रतिनिधियों की निष्ठा को महत्व देती है।"श्रीमती मुर्मु ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि उत्तराखंड विधान सभा में इस वर्ष नेशनल इलेक्ट्रॉनिक विधान एप्लीकेशन की व्यवस्था शुरु की गयी है तथा इसके माध्यम से दो सत्रों का संचालन किया जा चुका है। उत्तराखंड में अनुपम प्राकृतिक संपदा और सौन्दर्य विद्यमान हैं इसलिए प्रकृति का संरक्षण करते हुए ही विकास के मार्ग पर राज्य को आगे ले जाना है।

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