लखनऊ , अक्टूबर 31 -- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने ऐलान किया है कि 10 अक्टूबर को ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में लिऐ गए निर्णय के अनुसार केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता के नाम पर पूरे देश के विद्युत वितरण निगमों को निजी घरानों को सौंपने की कोशिश के विरोध में बिजली इंजीनियर देशभर के बिजली कर्मचारियों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे।

फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे और सेक्रेटरी जनरल पी रत्नाकर राव ने कहा कि बिजली संविधान की आठवीं अनुसूची में है जो समवर्ती सूची है जिसका तात्पर्य होता है कि बिजली के मामले में केंद्र और राज्य सरकार के बराबर के अधिकार है। ऐसे में छह प्रान्तों की ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में सारे देश पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का फैसला कैसे थोपा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि 10 अक्टूबर को हुई ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु ,आंध्र प्रदेश और राजस्थान के विद्युत मंत्री सम्मिलित थे। इनके बीच यह सहमति बनी कि विद्युत वितरण निगमों को केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता के लिए तीन विकल्प दिए जाए। पहला विकल्प विद्युत वितरण निगमों को 51 प्रतिशत इक्विटी बेचकर निजीकरण करने का, दूसरा विकल्प विद्युत वितरण निगमों को कम से कम 26 प्रतिशत इक्विटी निजी क्षेत्र को बेचने और प्रबंधन निजी क्षेत्र का स्वीकार करने और तीसरा विकल्प विद्युत वितरण निगमों को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराए जाने का है।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने आश्चर्य व्यक्ति किया कि छह प्रान्तों के ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में लिए गए निर्णय के आधार पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने इस मसौदे पर काम करना शुरू कर दिया है और बताया जा रहा है कि संसद के आगामी बजट सत्र में केंद्र सरकार यह प्रस्ताव रखने और पारित करने वाली है।

उन्होंने कहा कि एक ओर भारत सरकार ने निजी क्षेत्र को सरकारी विद्युत वितरण कंपनियों का नेटवर्क इस्तेमाल करने की इजाजत देने के लिए ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025, अक्टूबर 09 को जारी किया है तो दूसरी ओर इसकी प्रतीक्षा किए बिना अगले ही दिन 10 अक्टूबर को वित्तीय सहायता के नाम पर राज्यों पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय थोपने का फैसला ले लिया। फेडरेशन ने कहा कि इससे ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार संपूर्ण पावर सेक्टर का निजीकरण करने के लिए बेहद उतावली है।

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