विजयवाड़ा , फरवरी 13 -- आंध्र प्रदेश विधान परिषद में शुक्रवार को विद्यार्थियों को बकाया शुल्क के भुगतान को लेकर गरमागरम बहस हुई, जिसमें विपक्षी वाईएसआरसीपी विधायकों ने सरकार पर इस मामले में देरी करने का आरोप लगाया और पैसे जारी करने के समय पर स्पष्टता की मांग की।
हालांकि, सूचना एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि वाईएसआरसीपी द्वारा किए गए दावे भ्रामक एवं राजनीति से प्रेरित हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार आवश्यक कदम उठा रही है और इस मुद्दे को सही तरीके से निपटाया जा रहा है।
वाईएसआरसीपी के सदस्यों ने दावा किया कि बकाया राशि 7,800 करोड़ रुपये है जबकि सरकार ने अब तक केवल 1,200 करोड़ रुपये जारी करने का आदेश दिया है। विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि शेष राशि जानबूझकर रोकी जा रही है, जिससे छात्रों एवं शिक्षण संस्थानों को आर्थिक परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है।
विपक्षी नेता बोत्सा सत्यनारायण ने भुगतान में देरी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि छात्र पांच तिमाही से बकाया राशि के भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने लंबित बकाया राशि के भुगतान के लिए एक स्पष्ट समयसीमा की मांग की।
वाईएसआरसीपी सदस्यों के आरोपों का जवाब देते हुए, सूचना एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने सरकार की कार्यवाही का बचाव किया।
समाज कल्याण मंत्री डी बाला वीरंजनेय स्वामी ने दावा किया है कि वाईएसआरसीपी सरकार ने 2014-19 की अवधि के दौरान 224 करोड़ रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रही, जबकि इसके लिए धनराशि आवंटित की गई थी।
इन आरोपों का जवाब देते हुए विपक्ष के नेता बोत्सा सत्यनारायण ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सरकार के दावे निराधार हैं। उन्होंने सरकार से जूनियर कॉलेजों का अधिग्रहण करने के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा और शुल्क वापसी निधि के प्रबंधन पर सवाल उठाए।
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