फगवाड़ा , जनवरी 01 -- विज्ञान शिक्षक संघ ने पंजाब विद्यालय शिक्षा बोर्ड के उस निर्णय का कड़ा विरोध किया, जिसमें सत्र के मध्य में ही परीक्षा प्रश्नपत्र के प्रारूप में बहुविकल्पीय प्रश्नों (एमसीक्यू) का भार 40 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया था।

आठ दिसंबर, 2025 के बोर्ड पत्र के माध्यम से सूचित किये गये इस निर्णय पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें सदस्यों ने इस कदम को अनुचित और छात्रों की शैक्षणिक तैयारी के लिए हानिकारक बताया।

संघ की राज्य अध्यक्ष हरिंदर कौर की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित एक आपातकालीन बैठक में एसोसिएशन ने कहा कि वैचारिक समझ को मजबूत करना महत्वपूर्ण है, लेकिन शैक्षणिक सत्र के इस चरण में इतना बड़ा बदलाव लागू करना अनुचित है और इसे अगले सत्र की शुरुआत तक टाल देना चाहिए। सदस्यों ने बताया कि पूर्व परामर्श के बिना अचानक किये गये बदलाव शिक्षण योजनाओं को बाधित करते हैं और छात्रों पर अनावश्यक दबाव डालते हैं। पीएसईबी को एक औपचारिक ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें उनसे प्रश्न पत्र के प्रारूप में कोई भी बदलाव करने से पहले विभिन्न शिक्षक संगठनों से सुझाव लेने का आग्रह किया गया है।

एसोसिएशन ने यह भी मांग की कि परीक्षा प्रारूप में किसी भी संशोधन के साथ एक स्पष्ट अंकन योजना और नमूना प्रश्न पत्रों का प्रकाशन अनिवार्य किया जाये, जिससे छात्र अपनी तैयारी को संशोधित प्रारूप के अनुरूप ढाल सकें। इन उपायों के अभाव में छात्रों को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जिसका वार्षिक परीक्षाओं में उनके प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और मानसिक तनाव उत्पन्न हो सकता है।

छात्रों के अंकों और कल्याण पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए विज्ञान शिक्षक संघ ने बोर्ड से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने और संशोधित प्रश्नपत्र प्रणाली को अगले शैक्षणिक सत्र से ही लागू करने की अपील की। बैठक में रूपनगर से कुलवंत सिंह, पंजरुखा से सुखदेव सिंह, लुधियानासे हरिंदर सिंह, लुधियाना से जगदेव सिंह और अन्य उपस्थित थे।

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