नयी दिल्ली , जनवरी 8 -- सरकार विज्ञान एवं उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की संभावनाओं विश्व समुद्राय के समक्ष उभारने और इस क्षेत्र में दूसरे देशों के साथ आदान-प्रदान और सहयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रायसीना डायलाॅग के अंतर्गत एक नया संवाद कार्यक्रम शुरू करने जा रही है।

पहली रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल (एसडीआई) का आयोजन आगामी पांच से सात मार्च तक राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले रायसीना डायलॉग के साथ ही आयोजित की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय और गैर सरकारी संगठन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) ने रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव (एसडीआई) साझेदारी की गुरुवार को घोषणा की। यह इस विशेष संवाद कार्यक्रम का पहला संस्करण होगा।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय में आयोजित एक बैठक में प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद और ओआरएफ के अध्यक्ष डॉ. समीर ने विज्ञान क्षेत्र पर इस संवाद कार्यक्रम को शुरू करने पर सहमति जतायी। इस बैठक में पीएसए कार्यालय से डॉ. परविंदर मैनी (वैज्ञानिक सचिव), डॉ. प्रीति बंसल (सलाहकार/वैज्ञानिक 'जी') और डॉ. बी. चगुन बाशा (मुख्य नीति सलाहकार) उपस्थित थे। ओआरएफ की ओर से बैठक में तानौबी न्गांगोम और पुलकित मोहन ने भी भाग लिया।

वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने विज्ञप्ति में कहा कि एसडीआई का उद्देश्य रायसीना डायलॉग के भीतर एक समर्पित मंच तैयार करना है, जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कूटनीति के परस्पर जुड़ाव और उनके वैश्विक प्रभाव पर गहन चर्चा कर सके। बैठक में प्रोफेसर सूद ने वैश्विक नीतियों और राजनयिक संबंधों को नया आकार देने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की निर्णायक भूमिका पर विशेष बल दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत के लिए बदलते अनिवार्य लक्ष्यों, विकल्पों और उभरते अवसरों के इस दौर में विज्ञान और तकनीक का महत्व और भी बढ़ गया है।

बैठक में पहली वैज्ञानिक कूटनीतिक पहल के संभावित विषयों और व्यापक एजेंडे पर विस्तार से चर्चा की गई। यह पहल सामरिक स्वायत्तता के युग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी कूटनीति को आगे बढ़ाने, युगांतरकारी और उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रबंधन और एक मल्टीपोलर विश्व में वैज्ञानिक एवं तकनीकी साझेदारियों की बदलती वास्तविकताओं पर केंद्रित होगी। इसके अलावा इसमें तकनीकी नियंत्रण व्यवस्था, अनुसंधान सुरक्षा और वैश्विक मानक-निर्धारण और नियामक प्रक्रियाओं में न्यायसंगत भागीदारी जैसे समसामयिक मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस चर्चा के माध्यम से उभरते हुए वैज्ञानिक नेतृत्व और डीप-टेक नवाचारों को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया जाएगा, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय समकक्षों के साथ संवाद करने और साझेदारी बनाने के अवसर प्राप्त हो सकें।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित