चेन्नई , जनवरी 08 -- अभिनेता-राजनेता और तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के संस्थापक विजय की आख़िरी फ़िल्म 'जन नायकन' को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से अब तक सेंसर प्रमाण पत्र न मिलने के मुद्दे पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने एकजुट होकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला एवं संवैधानिक संस्थाओं के राजनीतिक दुरुपयोग का उदाहरण बताया है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि फ़िल्म को मंज़ूरी न मिलना न सिर्फ रचनात्मक स्वतंत्रता का हनन है, बल्कि यह सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश भी है। सेंसर बोर्ड की अनुमति में देरी रहने के कारण फ़िल्म की रिलीज़ की तारीख़ भी टल गयी है।

विरुधुनगर से कांग्रेस सांसद बी. मणिकम टैगोर, करूर से सांसद एस. जोतिमणि, अखिल भारतीय पेशेवर कांग्रेस के अध्यक्ष एवं डेटा एनालिटिक्स विभाग के चेयरमैन प्रवीण चक्रवर्ती, तमिलनाडु-पुडुचेरी के एआईसीसी प्रभारी गिरीश चोडणकर और अधिवक्ता प्रशांत सहित कई नेताओं तथा फ़िल्मी हस्तियों ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है।

मणिकम टैगोर ने 'एक्स' पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार "आरएसएस समर्थित नैरेटिव" पर जनता के भरोसे की कमी के चलते सिनेमा और रचनात्मक अभिव्यक्ति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, "संविधान का अनुच्छेद 19(1)(ए) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन क़ानून के बजाय डर के ज़रिये इसे कमजोर किया जा रहा है।" श्री टैगोर ने आरोप लगाया कि ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग के बाद अब सीबीएफसी को भी असहमति दबाने के औज़ार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

सांसद एस. जोतिमणि ने कहा कि एक फ़िल्म सैकड़ों लोगों की मेहनत और करोड़ों रुपये के निवेश से बनती है। राजनीतिक कारणों से उसे रोकना बेहद ख़तरनाक है। सेंसर बोर्ड की पूर्व सदस्य रहीं जोतिमणि ने आरोप लगाया कि मौजूदा दौर में यह संस्था पुरानी हो चुकी है और राजनीतिक दबाव का शिकार बन रही है।

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