चेन्नई , अप्रैल 10 -- अभिनेता एवं 'तमिलगा वेट्री कझगम' (टीवीके ) के संस्थापक-अध्यक्ष विजय की फिल्म "जना नायकन" के ऑनलाइन लीक होने से बवाल मच गया है।

यह फिल्म प्रमाणन विवाद के चलते महीनों से सेंसर बोर्ड के पास अटकी हुई थी। पार्टी ने इस लीक को एक राजनीतिक रूप से प्रेरित साज़िश करार दिया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब टीवीके तमिलनाडु के चुनावी समर में पहली बार उतरी है और 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों में श्री विजय को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर पेश कर रही है।

उन्होंने फरवरी 2024 में जब टीवीके की शुरूआत की थी, तो वे संसदीय चुनावों से दूर रहे थे और 2026 में विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाने को प्राथमिकता दी थी। तब उन्होंने घोषणा की थी कि 'जना नायकन' फिल्मों में उनका आखिरी प्रोजेक्ट होगा, जिसके बाद वे अपनी राजनीतिक यात्रा पर ध्यान केंद्रित करेंगे। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म का पूरा एचडी प्रिंट लीक हो गया है, जबकि कुछ का कहना है कि पायरेसी साइट्स द्वारा केवल पांच मिनट का एक क्लिप ही जारी किया गया है।

फिल्म के निर्देशक एच. विनोद ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी साइट्स से फिल्म डाउनलोड न करें। उन्होंने कहा कि फिल्म की टीम और प्रोडक्शन हाउस इस समस्या को सुलझाने के लिए कदम उठा रहे हैं। विनोद ने इंस्टाग्राम पर दर्शकों से गुज़ारिश की कि वे फिल्म को शेयर न करें। उन्होंने कहा, "हर सीन में कई लोगों के सपने और कड़ी मेहनत छिपी होती है। मैं सभी से गुज़ारिश करता हूँ कि वे हमारी टीम का साथ दें।"दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के बड़े नाम चिरंजीवी, एक्टर शिवा कार्तिकेयन, सिबी सत्यराज और कई अन्य लोगों ने फिल्म लीक होने पर हैरानी जताई है।

टीवीके के महासचिव (इलेक्शन कैंपेन मैनेजमेंट) आधव अर्जुन (जो विल्लीवाक्कम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं) ने इस गैर-कानूनी ऑनलाइन लीक के लिए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन तथा तमिलनाडु के उप मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को ज़िम्मेदार ठहराया है। श्री उदयनिधि एक मशहूर एक्टर भी हैं और एक फिल्म प्रोडक्शन हाउस भी चलाते हैं।

श्री अर्जुन ने इस लीक को 'राजनीति से प्रेरित एक मिलीभगत वाली साज़िश' बताया है। इस लीक को श्री विजय के लिए सीधा खतरा बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सत्ताधारी द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) ने मिलकर यह साज़िश रची है। उन्होंने कहा, "यह कोई इकलौती घटना नहीं है। यह राजनीति से प्रेरित एक मिलीभगत वाली साज़िश है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय संभालने वाले मुरुगन इस साज़िश के पीछे हैं और उन्हें श्री उदयनिधि का पूरा साथ मिल रहा है।"उन्होंने यहाँ पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया, "श्री मुरुगन और श्री उदयनिधि ने मिलकर श्री विजय को निशाना बनाने और उनकी राजनीतिक तरक्की को रोकने की कोशिश की है।" उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतों से टीवीके के नेता डरने वाले नहीं हैं। यह फिल्म असल में नौ जनवरी को पोंगल के त्योहार के मौके पर रिलीज़ होने वाली थी। उम्मीद थी कि चुनावों से पहले यह फिल्म टीवीके को मज़बूती देगी, लेकिन यह अभी भी सेंसर बोर्ड में फँसी हुई है।

जब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने शुरू में फिल्म को प्रमाण पत्र देने का अपना फैसला वापस ले लिया था, तो कांग्रेस ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर 'रचनात्मक आज़ादी का गला घोंटने' का आरोप लगाया था। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तो इसे 'तमिल संस्कृति पर हमला' तक कह दिया था।

इसके बाद जब प्रोडक्शन हाउस ने उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, तो एक एकल न्यायाधीश ने सीबीएफसी को फ़िल्म का प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया, लेकिन जब एक खंड पीठ ने इस फ़ैसले को पलट दिया, तो फ़िल्म बनाने वालों ने याचिका वापस ले ली थी और सीबीएफसी को फ़िल्म की दोबारा जाँच करने की अनुमति दे दी। दोबारा जाँच पूरी होने के बाद भी, प्रमाण पत्र जारी होने का मामला अभी भी अधर में लटका हुआ है।

अब, फ़िल्म के लीक होने से प्रशंसक और टीवीके समर्थकों में एक नयी दिलचस्पी पैदा हो गई है, जिनका ध्यान अब चुनाव पर ज़्यादा है, क्योंकि श्री विजय भी पार्टी के चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए हैं। चुनाव में टीवीके अकेले ही अपनी राह पर आगे बढ़ रही है, क्योंकि कांग्रेस के साथ गठबंधन करने की विजय की उम्मीद पूरी नहीं हो पायी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कांग्रेस पार्टी द्रमुक के साथ ही बनी रही, जो तमिलनाडु में 'इंडिया ' गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। श्री विजय द्वारा यह घोषणा किए जाने के बावजूद कि जनादेश मिलने पर वे सत्ता में हिस्सेदारी देंगे, कोई भी दूसरी पार्टी उनके साथ हाथ मिलाने के लिए आगे नहीं आई।

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