चेन्नई , जनवरी 09 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने कॉलीवुड फिल्मों के सुपरस्टार और तमिलगा वेट्ट्री कषगम (टीवीके) के अध्यक्ष विजय की अंतिम फिल्म 'जन नायकन' की रिलीज का रास्ता साफ कर दिया है। न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को फिल्म के लिए तुरंत यू/ए प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

न्यायालय से जीत के बाद फिल्म के पोंगल पर्व से पहले रिलीज होने की उम्मीद है। इससे पहले प्रोडक्शन हाउस ने फैसले का इंतजार किये बिना फिल्म की रिलीज स्थगित कर दी थी। यह फिल्म विजय की आखिरी फिल्म है। वह अपने करियर के शिखर पर हैं, इसके बावजूद उन्होंने राजनीति में कदम रखने के बाद फिल्मों से संन्यास की घोषणा कर दी है।

न्यायमूर्ति पीटी उषा ने छह जनवरी को सीबीएफसी अध्यक्ष के फिल्म को समीक्षा समिति के पास भेजने का आदेश रद्द कर दिया। आदेश में कहा गया है,"अध्यक्ष ने शक्ति का उपयोग बिना अधिकार के किया है, क्योंकि अध्यक्ष की समीक्षा का आदेश देने का अधिकार तब खत्म हो गया था, जब समिति की ओर से उन्होंने जानकारी दी थी कि कुछ कट लगाने के बाद फिल्म को यू/ए प्रमाणपत्र दिया जायेगा।"मल्टी-करोड़ फिल्म के निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस की सीबीएफसी अध्यक्ष की फिल्म को समीक्षा समिति के पास भेजने को चुनौती देने वाली याचिका को मंजूर करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि चूंकि अध्यक्ष का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर है, इसलिए उच्च न्यायालय अपनी स्वाभाविक शक्तियों का इस्तेमाल कर आदेश संशोधित कर राहत दे सकता है।

फिल्म को सेंसर प्रमाणपत्र मिलने में देरी ने कांग्रेस को भाजपा और मोदी सरकार पर हमले का मौका दे दिया था। पार्टी के बड़े नेता विजय के बचाव में आ गये थे। जहां एक तरफ कॉलीवुड फिल्म जगत विजय के साथ खड़ी हो गयी, वहीं तमिलनाडु के लिए कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडंकर से लेकर पार्टी नेताओं ने मोदी सरकार की निंदा की और उस पर सीबीएफसी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर विजय को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जिन्होंने भाजपा को टीवीके का वैचारिक दुश्मन बताया है।

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