नयी दिल्ली , फरवरी 19 -- उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को राजस्थान में दर्ज 30 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले में नियमित जमानत दे दी। अदालत ने राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांतt, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह कहते हुए अपील स्वीकार की कि दंपती जांच में सहयोग करने को तैयार हैं। इससे पहले शीर्ष अदालत श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम जमानत दे चुकी थी।

राहत देते हुए अदालत ने कहा कि यद्यपि एफआईआर में आपराधिक धोखाधड़ी से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं, लेकिन विवाद प्रथम दृष्टया एक व्यावसायिक लेनदेन से उत्पन्न प्रतीत होता है। अदालत ने सुझाव दिया कि मामले को मध्यस्थता के माध्यम से सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया जाए।

न्यायालय ने कहा, "विवाद एक व्यावसायिक लेनदेन से जुड़ा है। हालांकि एफआईआर में धोखाधड़ी आदि के तत्वों का उल्लेख है, लेकिन उपयुक्त रास्ता यह होगा कि विवाद को मध्यस्थता के दायरे में सुलझाया जाए। नियमित जमानत इस अपेक्षा के साथ दी गई है कि अपीलकर्ता सद्भावना से आचरण करेंगे और व्यावसायिक विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान का प्रयास करेंगे।"सुनवाई के दौरान भट्ट दंपती की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पीठ को बताया कि राजस्थान विधानसभा में उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई अंतरिम जमानत पर सवाल उठाए गए थे।

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