भोपाल , जनवरी 08 -- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की मध्य क्षेत्र न्यायपीठ, भोपाल ने भोपाल के अयोध्या बायपास परियोजना से जुड़े मामले नितिन सक्सेना बनाम एनएचएआई (ओए 100/2025) में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय पारित किया है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि आर्थिक विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई जैसे मुद्दे को अब राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाएगा, ताकि पूरे देश के लिए एक समान और ठोस नीति बनाई जा सके।

माननीय न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह एवं विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने कहा कि राजमार्गों एवं अन्य विकास परियोजनाओं के लिए होने वाली वृक्ष कटाई को नियंत्रित करने हेतु अखिल भारतीय स्तर पर एक समान नीति की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से मामले को एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकरण ने नई दिल्ली स्थित अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि इस विषय पर एक बड़ी पीठ का गठन किया जाए, जो सतत विकास, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत एवं एहतियाती सिद्धांत के आधार पर राष्ट्रीय नीति का प्रारूप तय करेगी। इस नीति का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन सुनिश्चित करना है।

यह मामला भोपाल में आसाराम तिराहा से करोंद होते हुए रत्नागिरी तिराहा तक प्रस्तावित 16 किलोमीटर लंबी 10 लेन सड़क परियोजना से जुड़ा है, जिसके लिए लगभग 8 हजार से 12 हजार पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। अधिकरण ने माना कि ये पेड़ स्थानीय निवासियों के लिए फेफड़ों के समान हैं और इनका संरक्षण जनहित में आवश्यक है।

आदेश में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के उस निर्देश को भी दोहराया गया, जिसके अनुसार राज्य में पेड़ों की कटाई या छंटाई के लिए एनजीटी द्वारा गठित समिति की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता एवं सृजन जैन ने तर्क दिया कि प्रस्तावित कटाई से भोपाल के पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। वहीं, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से विकास की आवश्यकता और परियोजना में शीघ्रता का हवाला दिया गया।

यह भी बताया गया कि एनएचएआई द्वारा 22 दिसंबर 2025 के स्टे आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपील को वापस लेने की जानकारी दी गई है, हालांकि इसके दस्तावेज अभी प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

मामले की गंभीरता और नीतिगत महत्व को देखते हुए एनजीटी ने सभी पक्षों को प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश देते हुए प्रकरण को शीघ्र सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित