जयपुर , जनवरी 07 -- राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम (वीबी जी राम जी) को लेकर दिए बयान पर पलटवार करते हुए इस योजना के उनके समर्थन को राजस्थान के ग्रामीण परिवेश और गरीब वर्ग की पीठ में छुरा घोंपने जैसा करार दिया है।

श्री जूली ने बुधवार को अपने बयान में कहा कि यह विडंबना है कि जिस पंचायती राज व्यवस्था से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले श्री भजनलाल शर्मा से गांवों को उम्मीद थी लेकिन वह आज ग्राम सभाओं के अधिकारों का गला घोंटने वाली योजना के ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं। जिस व्यवस्था ने उन्हें पहचान दी, आज उसे ही कमजोर करने में वे केंद्र का सक्रिय हिस्सा बन रहे हैं। यह सिर्फ राजनीतिक अवसरवाद नहीं, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात है।"उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यह राजस्थान का दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री स्वयं ग्रामीण परिवेश से होने के बावजूद दिल्ली के आलाकमान की भाषा बोल रहे हैं। वे राजस्थान के हितों की रक्षा करने के बजाय केवल दिल्ली के 'संदेशवाहक' बनकर रह गए हैं।

श्री जूली ने कहा कि अब तक मनरेगा का खर्च केंद्र सरकार उठाती थी लेकिन अब इसे 60:40 के अनुपात में बांटकर राज्यों पर 40 प्रतिशत फंड का बोझ डालना तानाशाही है। इससे राजस्थान के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और राज्य का खजाना खाली होगा। यह सीधे तौर पर संघीय ढांचे को नष्ट करने की साजिश है।

उन्होंने मनरेगा का नाम बदलने को इसके मूल सिद्धांतों पर हमला बताते हुए कहा कि मनरेगा एक 'कानूनी अधिकार' था जबकि नई योजना इसे केंद्र की मर्जी पर निर्भर बनाना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मनरेगा ने गांवों में रोजगार देकर पलायन रोका और महिलाओं को आर्थिक संबल दिया लेकिन भाजपा को गांधी और मनरेगा, दोनों खटकते हैं, इसलिए इस हक को छीनने की साजिश रची गई है।

श्री जूली ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस जनविरोधी नीति का सदन से लेकर सड़क तक कड़ा विरोध करेगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित