जयपुर , जनवरी 06 -- पत्र सूचना कार्यालय जयपुर के तत्वाधान में मंगलवार को विकसित भारत जी राम जी और चार नयी श्रम संहिताओं पर क्षेत्रीय मीडिया सम्मेलन 'वार्ता' का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ग्रामीण विकास विभाग एवं आयुक्त, रोज़गार गारंटी स्कीम की सचिव पुष्पा सत्यानी ने वार्ता को सम्बोधित करते हुए हाल में भारत सरकार द्वारा पारित कानून विकसित भारत जी राम जी पर राजस्थान सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि विकसित भारत जी राम जी में पुरानी मनरेगा योजना को और बेहतर और विकासोन्मुख बनाया गया है।
श्रीमती सत्यानी ने कहा कि रोजगार की गारंटी देने वाले इस कानून में ग्रामीण क्षेत्र के अकुशल कामगारों के लिए श्रम दिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के श्रमिकों को पहले से ज़्यादा रोज़गार के अवसर मिलेंगे। श्रीमती सत्यानी ने कहा कि विकसित भारत जी राम जी विधेयक 60 दिनों के फसलों की बुवाई और कटाई के समय को अधिसूचित किया गया है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों को आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने बताया कि विकसित भारत जी राम जी के तहत रोज़गार की गारंटी को पीएम गति शक्ति मिशन से जोड़ा जाएगा जिससे ग्रामीण क्षेत्र में आधारभूत अवसंरचना को विकसित करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अकुशल ग्रामीण श्रमिकों को फॉर्म 6 भरने पर 15 दिनों तक विकसित भारत जी राम जी के तहत काम नहीं मिलने पर बेरोज़गारी भत्ता दिया जाएगा। सम्मेलन के तकनीकी सत्र के प्रथम भाग में रोज़गार गारंटी स्कीम के अधीक्षण अभियंता आई. पी. अग्रवाल विकसित भारत जी-राम-जी विधेयक पर प्रस्तुतिकरण देते हुए बताया कि इसके तहत मूलभूत अवसंरचना, जल सम्बंधी कार्यों से जल सुरक्षा और प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के शमन के कार्यों को करने में ग्राम पंचायत की भूमिका वैसी ही रहेगी जैसे पहले थी, लेकिन इसमें अन्य विभागों की भागीगारी को बढ़ाया जाएगा। सोशल ऑडिट टीम के माध्यम से किए गए विकास कार्यों की निगरानी की जाएगी।
इस दौरान उपमुख्य श्रम आयुक्त निरंजन कुमार ने चार नए श्रम कानूनों के संदर्भ में विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया। श्री कुमार ने कहा कि 29 विभिन्न श्रम कानूनों को चार नए श्रम संहिता में बदलने की आवश्यकता इसीलिए पड़ी क्योंकि देश में श्रम कानून बहुत पुराने हो चुके थे। देश की औद्योगिक वृद्धि को देखते हुए नई श्रम संहिताओं की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने बताया कि देश के नए औद्योगिक परिवेश के दृष्टिगत नयी चार श्रम संहिताओं में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा एवं आर्थिक हितों के बीच एक संतुलन बनाया गया है। उन्होने ने बताया कि आगामी एक अप्रैल से चार नए श्रम संहिता लागू हो जाएंगे।
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