मुंबई , जनवरी 05 -- ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता और पूर्व विधायक वारिस पठान ने सवाल उठाया है कि मुम्बई का मेयर एक मुस्लिम, खासकर मुस्लिम महिला को क्यों नहीं होना चाहिए। मेयर के रूप में एक मुस्लिम मेयर क्यों नहीं स्वीकार्य होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि श्री पठान ने यह सवाल तब उठाया जब चारों ओर इस बात पर बहस हो रही है कि मुम्बई का मेयर हिंदू, मराठी या हिंदू-मराठी को होना चाहिए।

श्री पठान ने सोमवार को धारावी में एक जनसभा को संबोधित करते हुएपूछा, "अगर भारत में एक मुस्लिम राष्ट्रपति, एक मुस्लिम मुख्यमंत्री और एक मुस्लिम मुख्य न्यायाधीश हो सकते हैं, तो मुंबई में एक मुस्लिम मेयर क्यों नहीं हो सकता?" उन्होंने कहा कि किसी मुस्लिम को मेयर का पद संभालने का मौका न देना अलोकतांत्रिक और संविधान के खिलाफ है।

श्री पठान ने कहा कि एआईएमआईएम का सपना है कि एक दिन एक मुस्लिम महिला जो कलमा पढ़ती है, मुंबई के मेयर का पद संभाले। उन्होंने पूछा, "अगर कोई व्यक्ति जो खुलेआम कहता है 'मुझे महादेव से प्यार है' मेयर बन सकता है, तो एक मुस्लिम महिला क्यों नहीं?"बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों से पहले मेयर के पद को लेकर विवाद तेजी से बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दावा किया है कि अगर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना बीएमसी में सत्ता में लौटती है, तो 'खान' सरनेम वाला कोई व्यक्ति मेयर बन सकता है। इसके जवाब में शिवसेना (ठाकरे गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने जोर देकर कहा है कि मुंबई का मेयर एक मराठी होगा।

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