नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- गणतंत्र दिवस पर वायु सेना के प्रमुख लड़ाकू विमान इस बार फ्लाईपास्ट के दौरान 'सिंदूर फार्मेशन' में उडान भर कर अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे। वायु सेना हवाई प्रदर्शन की अपनी शानदार परंपरा को जारी रखते हुए और ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों में दुश्मन पर गहरी और सटीक प्रहार करने की क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन करेगी। सिंदूर फार्मेशन में सात विमान दो राफेल, दो सुखोई-30, दो मिग-29 और एक जगुआर विमान शामिल होंगे।
वायु सेना ने गुरुवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि फ्लाई-पास्ट में कुल 29 विमान शामिल होंगे जिनमें 16 लड़ाकू विमान, 4 हेलीकॉप्टर और 9 परिवहन विमान शामिल हैं। यह भारतीय वायु सेना की व्यापक संचालन पहुंच, बहुमुखी क्षमता और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी श्रेष्ठता को प्रदर्शित करेगा ।
फ्लाईपास्ट दो अलग-अलग ब्लॉकों में किया जायेगा जिसमें पहले ब्लॉक की शुरूआत चार एमआई-17 हेलीकॉप्टरों की 'ध्वज' फ़ॉर्मेशन से होगी। इसमें कर्तव्य पथ पर फुलों की पंखुडी बरसाई जायेंगी। इसके बाद 'प्रहार' फ़ॉर्मेशन में तीन उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) शामिल हैं और उसके बाद आर्मी एविएशन से हथियार प्रणाली-एकीकृत एएलएच की विक फ़ॉर्मेशन दिखाई जाएगी।
इसके बाद लड़ाकू हेलीकॉप्टरों की लाइन एस्टर्न फ़ॉर्मेशन में उड़ान भरेगी, जिसमें एक अपाचे और एक हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर शामिल होगा। ब्लॉक-1 की मुख्य विशेषता 'स्पीयरहेड' फ़ॉर्मेशन होगी, जो ऑपरेशन सिंदूर को श्रद्धांजलि अर्पित करेगी और इसमें प्रमुख लड़ाकू विमान जैसे राफेल, मिग-29, सुखोई-30 और जगुआर विमान शामिल होंगे, जो वायु सेना की लड़ाकू शक्ति और बहु-भूमिका क्षमता को दर्शाते हैं।
ब्लॉक-2 परेड के बाद होगा जिसमें वायु सेना की रणनीतिक एयरलिफ्ट, समुद्री और हवाई प्रभुत्व क्षमताओं का प्रदर्शन किया जाएगा।
'अर्जन' फ़ॉर्मेशन में एक सी-130 और दो सी-295 परिवहन विमान होंगे, इसके बाद 'वरुण' फ़ॉर्मेशन में पी-8आई समुद्री गश्ती विमान सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के साथ दिखाई देगा।
इस ब्लाक का मुख्य आकर्षण राफेल लड़ाकू विमानों की छह-विमानों वाली 'वज्रांग' एरोहेड फ़ॉर्मेशन, जो एकल राफेल द्वारा वर्टिकल चार्ली मैन्यूवर के साथ समाप्त होगी, जो सटीकता और उत्कृष्टता का प्रतीक है।
वायु सेना राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि समारोह का नेतृत्व करेगी, जिसमें स्क्वाड्रन लीडर हेमंत सिंह कण्यार को कमांडर, गार्ड ऑफ ऑनर के रूप में नामित किया गया है। यह श्रद्धांजलि सशस्त्र बलों के शहीद नायकों को सम्मानित करती है।
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