नयी दिल्ली , मार्च 30 -- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि देश में नक्सलवाद का संकट आदिवासी क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति, सरकारों की पहुंच दूरस्थ क्षेत्र तक नहीं पहुंचने और दूरस्थ इलाकों में विकास की गतिविधियों को नजरअंदाज करने के कारण पैदा हुई है और धीरे धीरे वामपंथी विचारधारा के लोगों ने आदिवासियों को भ्रमित कर इन कमियों का फायदा उठाया है।

श्री शाह ने लोकसभा में नियम 193 के "वामपंथ उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के प्रयास" पर हुई चर्चा पूरी होने के बाद कहा कि इस उग्रवाद को आदिवासियों के सहयोग से ही खत्म् कराया जा सका है जिसमें हमारे सुरक्षा बलों की भूमिका अत्यंत प्रशंसनीय है। इस बड़ी संख्या में उग्रवाद में सुरक्षाकर्मी देश के लिए शहीद हुए हैं उनके प्रति पूरा देश हमेशा नतमस्तक है।

उन्होंने कहा कि देश में गैरकानूनी प्रवृति को पनपने नहीं दिया जाएगा इस संकल्प के साथ मोदी सरकार ने नक्सलवाद को खत्म करने का काम किया। मोदी सरकार विकास पर विश्चास करती है और इसके तहत देश के हर कोने में सरकार की पहुंच है और विकासकार्यों को गति दी गई है। सरकार आदिवासी क्षेत्र के हर गांव का विकास कर रही है और नक्सलवाद के खात्मे का यह विकास कार्य ही सबसे बड़ा आधार बना है। उनका कहना था कि कुछ राज्यों में नक्सलवाद देर से खत्म इसलिए हुआ कि वहां जिस दल की सरकार रही है उसने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को खत्म् नहीं होने दिया लेकिन जब वहां भाजपा सरकार बनी तो 2024 को उन्होंने राज्य सरकार से पूरा सहयोग मिलने के आश्वासन बाद 31 मार्च 2026 तक देश में नक्सलवाद को खत्म करने की महत्वपूर्ण घोषणा की थी।

उन्होंने कहा कि इस उग्रवादी विचारधारा का प्रेरक वाक्य सच नहीं रहा है बल्कि अत्यंत घातक "सत्ता बंदूक से हासिल की जाती है' रहा है और इससे साफ होता है कि इनका लोकतंत्र पर कभी कोई विश्वास नहीं रहा है। सवाल था कि माओवादियों ने बस्तर को ही क्यों चुना, आजादी के बाद दशकों तक संशाधन और राजस्व कम था तो पूरे देश को विकसित करना संभव नहीं था। दूर दराज के क्षेत्रों तक राज्यों की पहुंच होनी चाहिए थी लेकिन राज्य में सुनियोजित भेदभाव होता रहा है इसलिए वहां आतंकवाद फैलता रहा और भोले भाले आदिवासियों को भ्रमित कर उनके हाथों में हथियार पकडा दिये गये। कठिन भौगोलिक स्थिति और सरकार की पकड़ कम होने के कारण भोले भाले आदिवासियों को नक्सली बना दिया गया।

गृहमंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों का मानना है कि 12 राज्यों में लाल गलियारा बनना और नक्सलवादियों का फैलाव कहीं न कहीं शक्ति का दुरुपयोग हुआ है। उनका यह भी कहना था कि आखिर नक्सलवादियों के पास कैसे इस तरह के आधुनिक हथियार आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्री जड़ों पर वार करने वाले तंत्र का सफाया उनकी सरकार ने किया है और उसी का परिणाम है कि देश में आज वामपंथी उग्रवाद का सफाया हो गया है।

उन्होंने कहा "मैं आज देश को यह बताने आया हूं कि माओवादी हिंसा करने वाले, नक्सली हिंसा करने वालों के दिन लद गये हैँ। यह वैचरिक लड़ाई है। वामपंथी विचारधारा अपना आधार खो चुकी है इसलिए वह अपने अस्तित्व के लिए आदिवासियों का इस्तेमाल करती रही है। रक्तपात उनका उद्देश्य रहा है लेकिन अब उनकी यह साजिश सफल नहीं होगी। वामपंथी उग्रवाद को देश से खत्म कर दिया गया है और देश में संविधान का राज है और इसके समानांतर कुछ नहीं चल सकता है। वामपंथियों ने संविधान और न्याय व्यवस्था को खत्म करने का काम किया है।"उन्होंने कहा कि वह कई बार कह चुके हैं कि हथियार डाल दो लेकिन हथियार नहीं डालेंगे। सरकार ने विश्वास दिलाया है कि सरकार उनकी हिफाजत करेगी लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। उल्टे विकास को रोका जा रहा है और विकास की गतिविधियों को आगजनी कर खत्म किया जाता रहा है। मालगाड़ियों में आग लगा दी गई और सीधे साधे लोगों को भ्रमित कर अपनी विचारधारा को आगे बढ़ाने का गलत रास्ता अख्तियार किया गया जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

गृहमंत्री ने कहा कि रूस में कम्युनिस्टों की सरकार बनी तो भारत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का गठन किया गया। जिस पार्टी की नींव विदेश से आई है वह देश का भला कैसे कर सकती है। अब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का गठन क्यों हुआ इसकी कहानी 1964 में शुरु हुई क्योंकि तब सोवियत संघ और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच झगड़ा हुआ तो चीन के माओवाद से प्रभावित मार्क्सवादी पार्टी का गठन भारत में भी हुआ। इसी तरह 1969 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एमएल का उदय हुआ जिसका मकसद संसदीय प्रणाली का विरोधकरना और सशस्त्र क्रांति की। लोकतंत्र का विरोध और सशस्त्र क्रांति की समर्थक विचारधारा ही नक्सलवादी विचारधारा है। उसके बाद कई संगठन बने और उन्होंने अपने अपने हिसाब से संगठन बनाए और माओवाद को एकत्रित करने का प्रयास किया लेकिन उसमें सफल नहीं हुए।

उन्होंने कहा कि ये संगठन बने और देश में 1925 से फैलते रहे हैँ। इनका इतिहास 101 साल का है और अन्याय के खिलाफ लड़ने का बुलेट का सहारा लेते रहे लेकिन अब मोदी सरकार ने उनके अत्याचार से निर्दोष नागरिकों को बचाने का काम किया है और वामपंथी उग्रवाद को खत्म कर दिया गया है। मोदी सरकार ने नागरिकोंकी सुरक्षा सुनिश्चित की है और जो लोग आम नागरिकों के खिलाफ खड़े होगे और उन्हें गुमराह करेंगे उसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और इसी का परिणाम है जो बात नहीं करना चाहते, हिंसा करना चाहते हैँ, बच्चों का अपहरण कर उनको हथियार पकड़ाते हैँ उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब दिया जाना चाहिए और वह दिया गया है।

श्री शाह ने मानवता के नाम पर लेख लिखने वाले लेखकों को गैरमानवतावादी करार दिया और कहा कि जो नक्सलवाद को सही ठहराते हैं, बच्चों के हाथों में बंदूक थामने वालों की विचारधारा को सही ठहराते हैं वे कैसे सही हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि विचारधारा जनता की भलाई से ऊपर नहीं हो सकती है। गृहमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद आदिवासी क्षेत्रों में विकास की प्रक्रिया शुरु हुई है। सड़के बनी हैं, मोबाइल टावर लगे हैं और आदिवासी क्षेत्रों को विकसित भारत से जोड़ने के लिए 20 हजार करोड़ रुपए खर्च किये जा चुके हैं। इन 12 साल में सैकड़ो ंबैँक शाखाएं हुई और बड़ी संख्या में डाकघर खोले गये हैं। एकलब्य आदर्श विद्यालय खोले गये, आईटीआई खोले गये और कौशल विकास केंद्र बनाए जिन पर 1200 करोड़ रुपए का और खर्च हुआ है। अस्पताल बनाए गये हैं और जनजातीय युवाओं के विकास के कार्यक्रम बने हैं।

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