सोलन , मार्च 26 -- हिमाचल प्रदेश में डॉ. वाई एस परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के शोधार्थी डॉ अंशुल कुमार को एक सम्मेलन में 'बेस्ट डॉक्टोरल डिसर्टेशन' (सर्वश्रेष्ठ शोध प्रबंध) अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि डॉ. अंशुल ने डॉ. भारती कश्यप के मार्गदर्शन-निर्देशन में फ्लोरीकल्चर और लैंडस्केपिंग विभाग से अपनी पीएचडी पूरी की। उनका शोध 'ताजे और सूखे गेंदे के फूलों से बने गुलाल की भंडारण क्षमता, भौतिक-रासायनिक और संवेदी विशेषताओं का अध्ययन' पर केंद्रित था।

यह अवॉर्ड 'इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑर्नामेंटल हॉर्टिकल्चर' (आईएसओएच) द्वारा 'फ्लोरीकल्चर और लैंडस्केपिंगएट2047 विकसित भारत' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रदान किया गया। गौरतलब है कि यह सम्मेलन 'केलाडी शिवप्पा नायक कृषि और बागवानी विज्ञान विश्वविद्यालय' में चल रहा है।वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-सीएसआईआर-हिमालयन बायोसोर्स प्रौद्योगिकी संस्थान के सहयोग से किए गए इस शोध के परिणामस्वरूप एक तकनीक विकसित हुई है। विभाग इस शोधकार्य से विकसित हर्बल गुलाल की बिक्री के माध्यम से आय भी अर्जित कर रहा है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने डॉ. कुमार को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी। फ्लोरीकल्चर और लैंडस्केपिंग विभाग के संकाय सदस्यों और छात्रों ने भी उन्हें बधाई दी।

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