पटना , जनवरी 05 -- वर्ष 2025 में बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुये कुल आठ भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की करीब 4.14 करोड़ रुपये की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को राज्यसात किए जाने की प्रक्रिया शुरू करते हुये इसकी स्वीकृति के लिये प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार को भेजा है।

निगरानी ब्यूरो के अनुसार जिन आठ लोगों के खिलाफ संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें दो तत्कालीन मुखिया, एक तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, एक न्यायिक दंडाधिकारी, एक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एक अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) एक टैक्स दारोगा और एक बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) शामिल हैं। इन सभी के विरुद्ध 2012 से 2019 के बीच भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए थे।

लखीसराय के तत्कालीन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर दिलीप कुमार के खिलाफ वर्ष 2012 में मामला दर्ज हुआ था। उनकी 88 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति राज्यसात करने का प्रस्ताव है। वहीं गोपालगंज के हथुआ में एसडीओ रहे विजय प्रताप सिंह की 62 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त करने की तैयारी है। वे अपर समाहर्ता और दरभंगा प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में आयुक्त के सचिव पद पर भी कार्यरत रह चुके हैं। उनके खिलाफ 2015 में भ्रष्टाचार के तीन मामले दर्ज किए गए थे।

इसके अलावा, पटना ग्रामीण की तत्कालीन सीडीपीओ फूलपरी देवी, मोतिहारी नगर परिषद के टैक्स दारोगा रहे अजय कुमार गुप्ता, और समस्तीपुर जिले के जितवारिया ग्राम पंचायत के तत्कालीन मुखिया प्रमोद कुमार राय भी सूची में शामिल हैं। इन सभी की 61 लाख रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त किए जाने की प्रक्रिया में हैं।

वर्ष 2016 में ग्रामीण कार्य विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश मांझी तथा पश्चिम चंपारण के लौरिया प्रखंड अंतर्गत राजमारहिया पकड़ी पंचायत के तत्कालीन मुखिया मैनेजर यादव के खिलाफ भी कार्रवाई प्रस्तावित है। मैनेजर यादव की 1.70 करोड़ रुपये की संपत्ति को राज्यसात करने की अनुशंसा की गई है। ओमप्रकाश मांझी को पहले ही सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।

निगरानी ने जुलाई 2019 में दरभंगा के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार राय के विरुद्ध भी भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। उनकी 41.12 लाख रुपये की संपत्ति जब्ती के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अब तक 119 मामलों में 96.76 करोड़ रुपये की संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव दिया है। इनमें से 66 मामले (57 करोड़ रुपये) सक्षम प्राधिकार की अदालत में लंबित हैं, जबकि 32 मामले (20.80 करोड़ रुपये) उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। दो मामले सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी के रूप में दर्ज हैं और दो मामलों में विपक्षी पक्ष की अपील के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है।

निगरानी के अनुसार अब तक 11 मामलों में 6.03 करोड़ रुपये की संपत्तियां अंतिम रूप से राज्यसात की जा चुकी हैं।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक (डीजी) जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि भ्रष्टाचारियों की अवैध संपत्तियों को राज्यसात करने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में आठ मामलों में प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार को सौंपा गया है और शीघ्र ही इन पर निर्णय की उम्मीद है।

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