मुंबई , फरवरी 13 -- बॉलीवुड के कई सितारों ने रुपहले पर्दे पर रेडियो को आवाज़ दी है।
हर साल 13 फरवरी को वर्ल्ड रेडियो डे मनाया जाता है। रेडियो आज भी ऐसा माध्यम है जो दूरियों को मिटाता है, लोगों को जोड़ता है और भावनाओं को आवाज़ देता है। पॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म से बहुत पहले, रेडियो ही बातचीत, संगीत और खबरों का सबसे भरोसेमंद ज़रिया था। बॉलीवुड ने रेडियो को हमेशा सिर्फ़ एक पेशे के रूप में नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने वाले एक भावनात्मक सहारे के रूप में दिखाया है। सिर्फ यही नहीं, हिंदी फिल्मों ने रेडियो के इस असर को कई यादगार किरदारों के ज़रिये भी दिखाया है।
सलाम नमस्ते (2005) में प्रीति ज़िंटा ने रेडियो जॉकी अम्बर "एम्बी" मल्होत्रा का किरदार निभाया था। यह किरदार आत्मनिर्भर, बेबाक और मॉडर्न था। उस समय जब एफएम रेडियो युवाओं में लोकप्रिय हो रहा था, एम्बी ने दिखाया कि आरजे सिर्फ़ गाने नहीं बजाते, बल्कि श्रोताओं के दोस्त भी होते हैं।
लगे रहो मुन्नाभाई (2006) में विद्या बालन यानी जान्हवी एक रेडियो शो होस्ट थीं, जो अपने शो के ज़रिये गांधीजी के विचार आम लोगों तक पहुँचाती हैं। इस फिल्म ने दिखाया था कि रेडियो कैसे समाज में सकारात्मक सोच और बदलाव ला सकता हैलगे रहो मुन्नाभाई (2006) में संजय दत्त का किरदार रेडियो जॉकी नहीं था, लेकिन रेडियो की भूमिका कहानी में बहुत अहम थी। रेडियो के ज़रिये 'गांधीगिरी' लोगों तक पहुँची और यह साबित हुआ कि यह माध्यम किसी की भी सोच को प्रभावित करने की ज़बरदस्त ताक़त रखता है।
गुज़ारिश (2010) में ऋतिक रोशन ने ईथन मैस्करेनहास का किरदार निभाया था, जो हादसे के बाद रेडियो जॉकी बन जाता है। उनका लेट-नाइट शो भावनाओं और शायरी से भरा होता है। यह किरदार दिखाता है कि रेडियो आवाज़ के ज़रिये दिलों से कैसे जुड़ता है।
तुम्हारी सुलु (2017) में विद्या बालन एक साधारण गृहिणी सुलु के रूप में नज़र आती हैं, जो लेट-नाइट रेडियो जॉकी बन जाती है। उनका किरदार रेडियो की सादगी और अपनापन दिखाता है, जहाँ श्रोता खुलकर अपनी बातें साझा करते हैं।
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