बैतूल , फरवरी 6 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के मुलताई शेरगढ़ क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित वर्धा डेम का पानी किसानों तक नहीं पहुंचने से मामला अब सिंचाई तक सीमित न रहकर राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब भारतीय जनता पार्टी के जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार खुलकर किसानों के समर्थन में सामने आए, जिससे पार्टी के भीतर हलचल मच गई है।

किसानों का आरोप है कि वर्धा डेम का निर्माण उनकी खेती को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन वर्तमान में डेम का पानी निजी ब्लूबेरी कंपनी को दिया जा रहा है। इससे रबी और खरीफ दोनों सीजन में किसानों के खेत सूखे पड़े हैं और वर्षों से सिंचाई की उम्मीद लगाए बैठे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार ने कहा कि वर्धा डेम पर पहला अधिकार किसानों का है, न कि किसी निजी कंपनी का। उन्होंने अधिकारियों से इस संबंध में जवाब तलब करते हुए स्पष्ट किया कि यदि समय पर किसानों को पानी नहीं मिला, तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। एक वरिष्ठ भाजपा पदाधिकारी का इस तरह किसानों के पक्ष में खड़ा होना पार्टी के भीतर असहजता का कारण बन गया है।

इधर किसानों का कहना है कि ज्ञापन, धरना और चेतावनियों के बावजूद न तो नहर निर्माण और न ही जल वितरण को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि किसानों के हित में बनाए गए डेम का लाभ निजी कंपनियों को क्यों दिया जा रहा है।

वर्धा डेम का यह मुद्दा अब केवल जल संकट नहीं, बल्कि किसानों और शासन के बीच टकराव तथा सत्ताधारी दल के भीतर उठती असहमति की आवाज बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।

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