(इम्बार्गो: सोमवार 09 फरवरी से पहले प्रकाशित न करें)नयी दिल्ली, 08 फरवरी (वार्ता) दिल्ली-एनसीआर में छतों से वर्टिकल लैंडिंग और टेकऑफ करने में सक्षम ई-एयर टैक्सी आने वाले समय में आवागमन में लगने वाले घंटों को मिनटों में बदल सकते हैं और इसके लिए अपनी इमारत की छत उपलब्ध कराने वालों के लिए कमाई का जरिया बन सकते हैं।
उद्योग परिसंघ सीआईआई की एडवांस्ड एयर मोबिलिटी पर जारी रिपोर्ट में एक पायलट कॉरिडोर मॉडल पर मंथन किया गया है जिसका विस्तार करने की भी संभावना है। इसमें पायलट के तौर पर गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट कॉरिडोर का सुझाव दिया गया है।
सीआईआई का कहना है कि इससे देश को इंफ्रास्ट्रक्चर की रुकावटों को कम करने और परिचालन में लगने वाले समय में भारी कटौती में मदद मिल सकती है। साथ ही शहर की भीड़भाड़ का समाधान मिल सकता है। नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु और नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को यहां यह रिपोर्ट जारी की। कार्यक्रम में नागर विमानन महानिदेशालय के महानिदेशक फैज अहमद किदवई, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष विपिन कुमार भी मौजूद थे।
इलेक्ट्रॉनिक एयर टैक्सी प्रौद्योगिकी से देश के नेट-जीरो लक्ष्यों को भी समर्थन मिलेगा। हालांकि इसके परिचालन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमन की भी आवश्यकता होगी। इन विमानों का परिचालन कम ऊंचाई पर होने से सुरक्षा बहुत बड़ा मुद्दा होगा।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि मास्टर प्लान में एयर टैक्सी कॉरिडोर और वर्टिपोर्ट लोकेशन को शामिल करने के लिए शहरी नियोजन में शामिल इकाइयों और स्मार्ट सिटी मिशन के साथ मिलकर काम करने से जमीन की उपलब्धता, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ग्रिड इंटीग्रेशन संभव हो सकेगा।
साथ ही, छतों से टेकऑफ और लैंडिग को भी एक समाधान के तौर पर रिपोर्ट में शामिल किया गया है। कमर्शियल हब, हॉस्पिटल, टेक पार्क और रेजिडेंशियल टावर की छतों के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है।
रिपोर्ट में 50-100 किमी की रेंज में कार्गो और जरूरी मेडिकल आपूर्ति पर फोकस करते हुए ड्रोन-आधारित लॉजिस्टिक्स परिचालन की सलाह दी गई है। इसमें टेक-ऑफ और लैंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जल्दी प्लानिंग पर भी जोर दिया गया है।
अस्पताल, मेट्रो स्टेशन और बिज़नेस डिस्ट्रिक्ट के साथ ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का आसानी से एकीकरण किया जा सकता है।
शुरुआती चरण के ट्रायल के लिए, रिपोर्ट में रियल-वर्ल्ड टेस्टिंग और विनियामक प्रोटोटाइपिंग के लिए पायलट जोन तय करने का सुझाव दिया गया है।
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