चंडीगढ़ , दिसंबर 30 -- हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने श्रम विभाग में सामने आये लगभग 1500 करोड़ रुपये के वर्कस्लिप घोटाले को गंभीर फर्जीवाड़ा बताया है और कहा है कि अब तक 13 जिलों की रिपोर्ट देखकर विभाग हैरान है और मामले की गहन जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने संकेत दियेकि आगे जांच में यह घोटाला और भी बड़े स्तर पर सामने आ सकता है।

श्री विज अम्बाला मे पत्रकारों से बातचीत में कहा कि श्रम विभाग का प्रभार संभालते ही यह मामला उनके संज्ञान में आया था। जांच में सामने आया कि एक ही कर्मचारी द्वारा हजारों श्रमिकों का सत्यापन किया गया, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। इसी संदेह के आधार पर सबसे पहले तीन जिलों में समरी इंस्पेक्शन कराया गया, जिसमें गड़बड़ी की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रदेश के सभी जिलों में जांच कराने का निर्णय लिया गया। सीमित स्टाफ होने के कारण सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर तीन सदस्यीय समितियां गठित करने और पंजीकृत श्रमिकों की सूची के आधार पर घर-घर जाकर सत्यापन कराने के निर्देश दिये गये। अब तक प्राप्त 13 जिलों की रिपोर्ट के अनुसार कुल 5,99,758 वर्कस्लिप में से केवल 53,249 वर्कस्लिप ही वैध पायी गयी हैं, जबकि शेष अवैध निकलीं। इसी तरह 2,21,517 पंजीकृत श्रमिकों में से मात्र 14,240 श्रमिक ही वास्तविक पाये गये हैं। श्रम मंत्री ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि मजदूरों के नाम पर सरकारी योजनाओं का लाभ कोई और व्यक्ति उठा रहा है। अब यह पता लगाया जाएगा कि वर्कस्लिप किसने बनायीं, कब से लाभ लिया गया और इसमें कौन-कौन जिम्मेदार है। उन्होंने बताया कि इस मामले में मुख्यमंत्री से विस्तृत जांच की सिफारिश की गयी हैं।

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