पटना , जनवरी 23 -- बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने वरीय राजस्व न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना और जानबूझकर विलंब के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं।

प्रधान सचिव सी. के. अनिल ने सभी अंचल अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया है कि वरीय राजस्व न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों का नियमानुसार अनुपालन हर हाल में सात दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

प्रधान सचिव द्वारा 22 जनवरी को जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार ने सात निश्चय-3 (2025-30) को 16 दिसंबर 2025 से लागू किया है, जिसके सातवें स्तंभ इज ऑफ लिविंग के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि राज्य के नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और बिना अनावश्यक विलंब के न्याय उपलब्ध हो।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा तथा उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि कई अंचल अधिकारी अपर समाहर्ता एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता द्वारा पारित अर्द्ध-न्यायिक राजस्व आदेशों को जानबूझकर लंबित रखकर उन्हें निष्प्रभावी बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसे विभाग ने न्यायिक व्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर विषय बताया है।

उपमुख्यमंत्री श्री सिन्हा ने विभिन्न स्तर पर न्यायिक निर्देशों के अनुपालन में लापरवाही पर कड़ाई बरतने और प्रमंडलीय आयुक्त, समाहर्ता, अपर समाहर्ता एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता के न्यायालयों में भी उपरोक्त आदेश के अनुपालन का निर्देश दिया है।

प्रधान सचिव ने स्पष्ट किया कि अंचल अधिकारी प्राथमिक राजस्व न्यायालय के रूप में कार्य करते हैं और विभिन्न अधिनियमों के तहत उन्हें न्यायालय की शक्तियां प्रदत्त हैं। वहीं, भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) अंचल अधिकारी के आदेशों के अपीलीय प्राधिकार हैं, जबकि जमाबंदी रद्दीकरण के मामलों की प्रारंभिक सुनवाई अपर समाहर्ता के न्यायालय में होती है। जिला स्तर पर समाहर्ता राजस्व न्यायालय प्रशासन के सर्वोच्च प्राधिकारी हैं, जिनके आदेश निचली अदालतों के लिए बाध्यकारी और अंतिम होते हैं।

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