देहरादून , मार्च 21 -- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान में दो दिवसीय "वन-आधारित सतत जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना: मुद्दे और चुनौतियाँ" विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ लगाना नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना भी है।

श्री यादव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रकृति सर्वोपरि है और मानव अस्तित्व के लिए उसके साथ सह-अस्तित्व में रहना अनिवार्य है। उन्होंने वानिकी के प्रति समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय का आह्वान किया। उन्होंने वन संसाधनों को बनाए रखने में सांस्कृतिक मूल्यों, ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी), और कार्बन क्रेडिट के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वन केवल अर्थव्यवस्था के लिए ही नहीं, बल्कि शांति के लिए भी आवश्यक हैं।

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