जयपुर , फरवरी 09 -- राजस्थान के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री संजय शर्मा ने कहा है कि प्रदेश में वन मेलों के आयोजन का उद्देश्य वन, वन्य जीव संरक्षण के साथ वनों से मिलने वाली औषधियों एवं वन्य उत्पादों का उत्पादन करने वाले आदिवासियों एवं अन्य लोगों को अपनी आजीविका चलाने के लिए बाजार उपलब्ध कराना है।

श्री शर्मा ने वन विभाग द्वारा प्रकृति संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नौ एवं दस फरवरी को यहां सचिवालय नर्सरी में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरिय वन मेले का सोमवार को उद्घाटन किया और यह बात कही। उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा उदयपुर, कोटा की दर्ज पर सर्वप्रथम संभाग स्तरीय उसके पश्चात् जिला स्तरीय वन मेलों का आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने भोपाल, मध्यप्रदेश की दर्ज पर जयपुर मे भी राष्ट्र स्तरीय वन मेले का आयोजन राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा ताकि वन्य औषधियों एवं वन्य उत्पादों का उत्पादन करने वाले आदिवासियों एवं अन्य व्यक्तियों को अपनी आजीविका चलाने के लिए बाजार उपलब्ध हो सके। इस दौरान उन्होंने आरएफबीडीपी परियोजना के तहत प्रकाशित स्वयं सहायता समूहों की आजीविका संवर्धन मार्गदर्शिका का विमोचन भी किया।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख पवन कुमार उपाध्याय ने कहा कि इस प्रकार के मेले आयोजित करने का उद्देश्य वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण के साथ-साथ वनो में उत्पादित औषधियों एवं अन्य वन्य उत्पादों के क्रय से जीविका उपार्जित करने वाले आदिवासिायो एवं अन्य लोगों को बाजार उपलब्ध कराना है। मेले में राजस्थान के विभिन्न जिलों जैसे उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, चूरू, करौली, अलवर, टोंक, दौसा, सवाईमाधोपुर, जयपुर, कोटा, बारां, प्रतापगढ़, राजसमंद, बीकानेर, झालावाड़ आदि से वनमंडलों, स्वयं सहायता समूहों, राजीविका के स्वयं सहायता समूह, गैर-सरकारी संगठनों तथा अन्य संस्थाओं की भागीदारी है। मेले में लगाए जाने वाले स्टॉल्स पर राजस्थान एवं अन्य क्षेत्रों के वन उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जा रहा है। जिनमें प्रमुख रूप से शहद एवं जामुन आधारित उत्पाद, लाख, गोंद एवं जड़ी-बूटी उत्पाद, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, एलोवेरा उत्पाद, हर्बल साबुन, फेस पैक, हेयर ऑयल आदि, बांस एवं बांस से निर्मित वस्तुएं (तीर-कमान सहित), लकड़ी हस्तशिल्प एवं कावड़ कला उत्पाद, मिलेट आधारित खाद्य पदार्थ (बिस्किट, लड्डू, नमकीन, पेय पदार्थ आदि), मसाले, अचार, अमला कैंडी, आमचूर पाउडर, नीम उत्पाद, गौ-काष्ठ एवं जैव उर्वरक, मंडाना जनजातीय कला एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित कलात्मक सामग्री, बीज, पौध सामग्री एवं नर्सरी उत्पाद, थार क्षेत्र के विशेष उत्पाद जैसे कैर, सांगरी एवं अन्य लघु वनोपज, पंच गौरव उत्पाद सहित करीब 52 स्टॉल्स लगाए गए है।

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