हल्द्वानी , नवंबर 18 -- उत्तराखंड में हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में मंगलवार को एक बार फिर जंगलों में रहने वाले हजारों परिवारों की आवाज बुलंद हुई। नैनीताल जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों से आए वन एवं खत्तेवासियों ने एक दिवसीय प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत राजस्व गांव का दर्जा दिए जाने की मांग का ज्ञापन भेजा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदर्शन में शामिल समितियों के प्रतिनिधियों ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2006 में एफआरए बनाकर वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को उनकी पुश्तैनी जमीन पर मालिकाना हक देने का मार्ग साफ किया था लेकिन उत्तराखंड में आज तक इस अधिनियम को सही तरीके से लागू नहीं किया गया है। इसके कारण हजारों परिवार अपनी ही जमीन पर अवैध दखलधारी की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि वे पीढ़ियों से जंगलों में बसे हैं, खेती करते हैं, घर बसाए हुए हैं और पूरी जीवन-गाथा इसी भूमि से जुड़ी है, फिर भी उन्हें न तो जमीन का अधिकार मिलता है न ही राजस्व गांव के रूप में सरकारी सुविधाएं। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क - हर सुविधा के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है।

समितियों ने स्पष्ट कहा कि एफआरए समितियाँ अपनी ओर से सभी आवश्यक दस्तावेज, सर्वे और प्रक्रियाएं पूरी कर चुकी हैं, लेकिन जिला और राज्य स्तर पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। इसी उपेक्षा के खिलाफ आज खत्तेवासियों ने एकजुट होकर आवाज उठाई।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि एफआरए कोई रियायत नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है। अधिनियम में साफ लिखा है कि पारंपरिक वनवासियों को उनकी भूमि का अधिकार मिलना ही चाहिए। इसलिए सरकार को अब विलंब खत्म करके इस दिशा में ठोस कार्यवाही करनी चाहिए।

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