भोपाल , जनवरी 05 -- मध्यप्रदेश में वन्य-जीवों की सुरक्षा एवं अवैध शिकार पर रोक लगाने के उद्देश्य से 10 जनवरी से 15 फरवरी तक ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-II अभियान चलाया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही.एन. अंबाडे ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप-II के तहत प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वन मण्डल एवं 11 परियोजना मण्डलों में वन्य-जीवों के अवैध शिकार में प्रयुक्त फंदा, विद्युत करंट, स्नेयर ट्रैप, खटका जैसे साधनों से शिकार करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निर्देशों के अनुसार प्रत्येक वन मण्डल, टाइगर रिजर्व एवं वन विकास मण्डल इकाई में उप वन मण्डल स्तर के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जो अभियान से संबंधित जानकारी निर्धारित प्रारूप में ऑनलाइन दर्ज करेगा। अभियान की अवधि एक माह पांच दिवस की होगी।

इस दौरान दिन और रात में सघन गश्त की जाएगी। सप्ताह में न्यूनतम तीन दिवस परिक्षेत्र अधिकारी, दो दिवस वन मण्डलाधिकारी एवं उप वन मण्डलाधिकारी तथा एक दिवस क्षेत्र संचालक व मुख्य वन संरक्षक द्वारा गश्त अनिवार्य होगी। गश्ती के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों, शिकारी एवं घुमक्कड़ समुदाय के डेरों की सघन जांच की जाएगी। आवश्यकता अनुसार डॉग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर का भी उपयोग किया जाएगा।

वन राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्रों, कृषि क्षेत्रों की बाड़ एवं फेंसिंग की भी सर्चिंग की जाएगी। प्रदेश में कार्यरत 14 रीजनल रेस्क्यू स्क्वाड एवं एक राज्य स्तरीय रेस्क्यू स्क्वाड की सहायता से वन अपराध प्रकरण दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। शिकार में प्रयुक्त फंदे या विद्युत तार पाए जाने पर विधिवत जप्ती कर अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया जाएगा।

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