बीजापुर , जनवरी 08 -- छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री तथा गृह मंत्री विजय शर्मा ने बीजापुर में वनोपज संग्रहण के माध्यम से स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाने की अपार संभावनाएं बताई हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने गुरुवार को जिले में कार्यरत सीएलएफ के पदाधिकारियों और स्थानीय वनोपज व्यापारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक की।

बैठक में उपमुख्यमंत्री ने इमली के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिला समूहों को केवल कच्ची इमली बेचने तक सीमित न रहकर, उसकी ग्रेडिंग, बीज निकालने और पैकेजिंग जैसे कार्यों से जुड़ना चाहिए। इससे इमली के गूदे या इमली की चपाती जैसे उत्पाद बनाकर आमदनी कई गुना बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को घर के पास ही स्थायी रोजगार मिलेगा और वनोपज का उचित मूल्य भी सुनिश्चित होगा।

बैठक में मौजूद व्यापारियों ने बताया कि मूल्य संवर्धन से कच्चे उत्पाद की तुलना में दो से चार गुना तक अधिक दाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उपमुख्यमंत्री ने इमली के साथ-साथ महुआ, टोरा, चिरौंजी और आंवला जैसे अन्य बहुमूल्य वनोपज पर भी चर्चा की और इनके प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

श्री शर्मा ने महिला समूहों के सदस्यों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिए जाने और अध्ययन भ्रमण पर ले जाने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि इससे बस्तर क्षेत्र के बहुमूल्य वन संपदा का लाभ सीधे स्थानीय संग्राहकों तक पहुंचेगा और महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगी।

इस बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसा सहित कमिश्नर बस्तर, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। यह आयोजन बीजापुर के आदिवासी अंचल में महिला सशक्तिकरण और आजीविका के नए रास्ते खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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