, Dec. 10 -- भाजपा के रामचंद्र जांगड़ा ने कहा कि बंकिम चंद्र चटर्जी ने ब्रिटिश सरकार के ' सेव द ट्री' के विरोध में वंदे मातरम की रचना की थी।
उन्होंने कहा कि इस गीत में किसी भी धर्म के खिलाफ कोई बात नहीं कही गयी है और इसमें किसी तरह की सांप्रदायिकता का भाव नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर किसी की ऐसी सोच है तो वह तुष्टिकरण के अलावा और कुछ नहीं है। यह भारत का प्रेरक गीत है।
आम आदमी पार्टी की स्वाति मालिवाल ने कहा कि वंदे मातरम स्वतंत्रता संग्राम की पहली धड़कन है और इसने देश के हर व्यक्ति को ब्रिटिश सरकार से लड़ने की ताकत प्रदान की। वंदे मातरम का नारा ब्रिटिश सरकार को सबसे ज्यादा डराता था।
बीजू जनता दल के निरंजन बिशी ने कहा कि वंदे मातरम गीत ने आदिवासी क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए आदिवासी नेताओं में अलख जगाया और यह देश तथा आदिवासियों के आत्म स्वाभिमान का प्रतीक है।
भाजपा के डा. भागवत कराड़ ने कहा कि वंदे मातरम पर चर्चा कराने का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है और यह स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की शुरू से ही सोच वंदे मातरम के खिलाफ रही है।
कांग्रेस के नासिर हुसैन ने कहा कि वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश की जा रही है यह सही नहीं है।
वर्ष 1937 में सुभाष चंद्र बोस,महात्मा गांधी और अन्य नेताओं की सहमति से यह निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर लगाये जा रहे तुष्टिकरण के आरोप सही नहीं है। यह सोची समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है। वंदे मातरम से किसी को कोई एतराज या समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल भाजपा शासित राज्यों में ही यह समस्या है। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिन्दू महासभा का स्वतंत्रता संग्राम में कोई इतिहास नहीं है इसलिए ये अब इतिहास में घुसने की कोशिश कर रहे हैं।
बीजद की सुलता देव ने वंदे मातरम के पहले पैरे को गाने के बाद कहा कि इस गीत में ही देश के प्रति सम्मान के संबंध में सबकुछ है।
उन्होंने कहा कि आज इसे भी विवादों में खींच लिया गया है। उन्होंने कहा कि अभी कुछ भी सुफलाम सुजलाम नहीं है और प्रदूषण बड़ी समस्या है इसलिए इस पर चर्चा की जानी चाहिए।
निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि वंदे मातरम ने देश के हर व्यक्ति के विचारों को जाग्रत किया था और इसीलिए ब्रिटिश सरकार इससे डरती थी। उन्होंने कहा कि राजनीति, धर्म , मजहब और पार्टी से पहले राष्ट्र है और वंदे मातरम राष्ट्र के गौरव का प्रतीक है।
आम आदमी पार्टी के विक्रमजीत सिंह साहनी ने स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब के लोगों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि फांसी की सजा पाने वाले 121 स्वतंत्रता सेनानियों में से 93 पंजाब के थे।
केन्द्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि वंदे मातरम देश की भक्ति , शक्ति और प्रेरणा है।
भाजपा के बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने वंदे मातरम को भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का संगम बताते हुए कहा कि यह राष्ट्र की आत्मा है।
भाजपा की धर्मशिला गुप्ता ने कहा कि वंदे मातरम वह संकल्प और स्वर है जिसने समूचे देश को स्वतंत्रता के मार्ग पर अग्रसर किया। इतिहास इस बात का प्रमाण है कि यह समूचे देश का गान है। उन्होंने कहा कि जिस बंगाल में इस गीत की रचना हुई वहीं बंगाल इस गीत से दूरी बनाता नजर आ रहा है। यह दुख का विषय है।
शिवसेना यूबीटी की प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि वंदे मातरम की चर्चा को देश के हर व्यक्ति को सुनना चाहिए जिससे कि उसे इतिहास की सच्च्चाई का पता चले। उन्होंने कहा कि यह अफसोस की बात है कि जो सरकार आज वंदे मातरम पर चर्चा करा रही है उसी सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर सदस्यों को सदन में वंदे मातरम का नारा नहीं देने को कहा था।
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