नयी दिल्ली , जनवरी 09 -- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की अभिव्यक्ति है।
श्रीमती गुप्ता ने वंदे मातरम् गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर सदन में चर्चा कहा कि लगभग 150 वर्ष पहले रचा गया यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की चेतना का स्वर रहा है। यह गीत भारत की भूमि, प्रकृति, संस्कृति और सभ्यता की वंदना करता है और स्मरण कराता है कि भारत की मिट्टी केवल अन्न ही नहीं, बल्कि संस्कार और संस्कृति भी उत्पन्न करती है।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय गीत पर विधानसभा में चर्चा होना अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि इस गीत की 100वीं वर्षगांठ के दौरान देश आपातकाल के दौर से गुजर रहा था, जिसके कारण राष्ट्रीय गीत के महत्व को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल सका। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश 'विकास भी और विरासत भी' के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है। भारत निरंतर प्रगति की नयी ऊंचाइयों को छू रहा है। साथ ही अपनी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश धीरे-धीरे गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलकर एक आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है, जहां 'विकसित भारत' का लक्ष्य स्पष्ट रूप से हमारे सामने है।
उन्होंने कहा कि महान साहित्यकार और राष्ट्रवादी चिंतक बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित यह गीत वर्ष 1875 में लिखा गया था। वर्ष 1882 में इसे आनंद मठ उपन्यास में सम्मिलित किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गीत किसी धर्म, पंथ, वर्ग या राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह मातृभूमि और उसकी संतान के बीच के अटूट संबंध का प्रतीक है। वंदे मातरम् राजनीति से ऊपर राष्ट्रनीति का प्रतीक है। दुर्भाग्यवश कुछ लोग इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करते हैं, जबकि इसके प्रत्येक शब्द में सिर्फ भारत माता का गुणगान निहित है। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत की नदियों, पर्वतों, खेतों और उसकी समृद्धि का उद्घोष करता है तथा देशवासियों को एक सूत्र में पिरोता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में देश के भीतर वैचारिक संघर्ष चल रहा है, जिसे किसी हथियार से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से ही लड़ा जा सकता है। वंदे मातरम् इसी राष्ट्रीय चेतना का सशक्त स्वर है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश का युवा वर्ग भारत की आवाज बनेगा, भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगा और विकसित भारत का नेतृत्व करेगा।
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