भोपाल , जनवरी 19 -- राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि भगवान बिरसा मुण्डा के जमीनी, जन-आधारित संघर्ष और 'वंदे मातरम्' के वैचारिक एवं आध्यात्मिक स्वरों ने मिलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम को व्यापक जनाधार प्रदान किया। इन दोनों ने आंदोलन को स्पष्ट दिशा और आत्मिक शक्ति दी तथा भारत की विविधता में निहित एकता और शक्ति को प्रमाणित किया।

राज्यपाल श्री पटेल सोमवार को राष्ट्रीय चेतना के दो स्वर विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में शिक्षित, शहरी, ग्रामीण और वंचित वर्गों की सामूहिक भागीदारी से ही स्वतंत्र राष्ट्र का स्वप्न साकार हुआ। इसी भावना के साथ युवाओं को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर होना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि भगवान बिरसा मुण्डा केवल एक क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि वे जनजातीय चेतना, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक स्वाभिमान के महान प्रतीक थे। उनका नारा 'अबुआ दिशुम, अबुआ राज' जल, जंगल और जमीन के अधिकार के साथ आत्मनिर्णय की चेतना का उद्घोष था, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को ग्रामीण भारत की आत्मा तक पहुंचाया। वहीं 'वंदे मातरम्' भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक और भावनात्मक आत्मा बनकर उभरा, जिसने राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान की भावना को जन-जन में प्रतिष्ठित किया।

राज्यपाल श्री पटेल ने भगवान बिरसा मुण्डा और 'वंदे मातरम्' के रचनाकार बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कलाव्योम फाउंडेशन को इस विचारोत्तेजक आयोजन के लिए बधाई दी।

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