लखनऊ , दिसम्बर 22 -- उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने वंदेमातरम् को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया है।

यहां जारी एक बयान में आराधना मिश्रा ने कहा कि वंदेमातरम् देश के प्रत्येक नागरिक से भावनात्मक रूप से जुड़ा स्वतंत्रता संग्राम का गीत है, लेकिन भाजपा इसे राजनीतिक हथियार बनाकर लोगों में विभाजन पैदा करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस का न तो वंदेमातरम् से कोई ऐतिहासिक संबंध रहा है और न ही आजादी के आंदोलन में उनकी कोई भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि वंदेमातरम् देश की आजादी का गीत है, जिसे सुनते ही स्वतंत्रता सेनानियों में जोश भर जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री और भाजपा उस गीत और आजादी के नारों के नाम पर भी राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस नेता ने भाजपा नेताओं द्वारा वंदेमातरम् की शताब्दी पर कार्यक्रम न होने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 30 दिसंबर 1976 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वंदेमातरम् के शताब्दी वर्ष के अवसर पर डाक टिकट जारी किया था। उन्होंने कहा कि 28 अक्टूबर 1937 के कांग्रेस अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के शब्दों को सर्वसम्मति से स्वीकार कर कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने वंदेमातरम् को राष्ट्रीय गीत घोषित किया था।

मोना ने कहा कि उस निर्णय में पंडित जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, आचार्य कृपलानी, मदन मोहन मालवीय और आचार्य नरेंद्र देव सहित सभी वरिष्ठ नेताओं की सहमति थी। उन्होंने सवाल किया कि उस समय जनसंघ और आरएसएस कहां थे। उन्होंने भाजपा पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए 1998 की घटना का भी उल्लेख किया, जब उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के कार्यकाल के दौरान स्कूलों में वंदेमातरम् को अनिवार्य किया गया था, लेकिन विरोध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के हस्तक्षेप से इसे वापस लेना पड़ा था।

इस बीच, विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस नेत्री आराधना मिश्रा ने राज्य में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से मनमानी और अवैध वसूली की जा रही है और सरकार बिजली क्षेत्र को निजीकरण की दिशा में ले जाना चाहती है।

मोना ने कहा कि स्मार्ट मीटर की कीमतों को लेकर विद्युत नियामक आयोग की संस्तुति नहीं ली गई है, जो नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के बावजूद बिना उपभोक्ता की सहमति स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रीपेड व्यवस्था गरीब और दिहाड़ी मजदूरों के लिए अव्यावहारिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ष 2018 में लगाए गए 2जी मीटरों पर 959 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद अब उन्हें हटाकर 681 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं, जिसका बोझ अंततः जनता पर पड़ेगा। कांग्रेस नेता ने मांग की कि सरकार स्मार्ट मीटर योजना पर पुनर्विचार करे और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे।

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