नयी दिल्ली , फरवरी 12 -- लोक सभा ने गुरुवार को औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 ने तीन बड़े श्रम कानूनों - व्यवसाय संघ अधिनियम 1926, औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम 1946, औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 का स्थान लिया था। यह देश के कानूनी संरचना में सरकार के बड़े बदलाव का हिस्सा था। यह संसद द्वारा पास किये गये चार श्रम संहिता में से एक था, जिसका मकसद श्रम और औद्योगिक संबंध को नियंत्रित करने वाली नियामक प्रणाली का पालन आसान बनाना और उसे आधुनिक बनाना था।

श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने विधेयक पेश करते हुए कहा, "हालांकि तीनों कानूनों का निरसन नयी श्रम संहिता के सेक्शन 104 के लागू होने से ही हुआ है लेकिन भविष्य में इस गलतफहमी के आधार पर भ्रम पैदा होने की आशंका है कि अधिनियम इन कानूनों को हटाने की शक्ति कार्यपालिका को देता है।" उन्होंने कहा कि सेक्शन 104 और फरवरी 2026 में जारी एक अधिसूचना पहले ही स्थिति साफ कर चुका है, " भविष्य में किसी भी बेवजह की मुश्किल से बचने के लिए प्रस्तावित बदलाव को लाना सही माना जा रहा है। "इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए श्री मांडविया ने कहा कि नयी श्रम संहिताओं में समान कार्य के लिए समान वेतन अनिवार्य करने के प्रावधान किये गये हैं। इनमें न्यूनतम वेतन की गारंटी दी गयी है। प्रत्येक राज्य को प्रत्येक कार्यस्थल पर न्यूनतम वेतन की गारंटी देनी होगी।

उन्होंने कहा कि पहले पांच वर्ष तक काम करने के बाद ही ग्रेच्युटी देने के प्रावधान थे लेकिन अब एक वर्ष तक काम लेने के बाद भी कामगार को ग्रेच्युटी देना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक एक वर्ष में कामगारों के स्वास्थ्य की जांच करानी होगी।

श्री मांडविया ने कहा कि नयी श्रम संहिताओं को लागू हुए करीब ढाई महीने हुए हैं, इनके लागू होने के बाद मिली प्रतिक्रिया अच्छी रही है। न केवल बड़े शहरों बल्कि दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों में भी इन श्रम संहिताओं को लेकर उत्साहजनक माहौल रहा है।

विधेयक पर श्री मांडविया के जवाब के बाद विधेयक पर खंडवार विचार किया गया। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन. के. प्रेमचंद्रन के संशोधन क्रमांक एक को ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया गया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी की डी पुरंदेश्वरी के संशोधन क्रमांक दो को ध्वनिमत से स्वीकार किया गया। इसके बाद विधेयक को यथा संशोधित पारित कर दिया गया।

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